हॉस्टलों के अनिवार्य पंजीकरण पर जोर, बाल अधिकार आयोग ने दिए संकेत

उत्तराखंड में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है। शिकायतों के आधार पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक मदरसे का निरीक्षण किया, जहां कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम को पता चला कि मदरसे के बेसमेंट में हॉस्टल संचालित किया जा रहा था। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा मानकों का अभाव, छोटे कमरों में क्षमता से अधिक बच्चों को रखना और बाहरी राज्यों से बच्चों को लाने जैसी गंभीर बातें भी सामने आईं।

आयोग ने इन व्यवस्थाओं को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, मानसिक विकास और उनके अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का मानना है कि प्रदेश में संचालित सभी हॉस्टलों के लिए सख्त नियमावली और अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

आयोग ने साफ किया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही संबंधित संस्थानों में सुरक्षा मानकों और बच्चों के अधिकारों को लेकर सख्ती बढ़ाने के संकेत भी दिए गए हैं।

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