पंजाब

बिजली कटौती के खिलाफ जालंधर में किसानों का बड़ा प्रदर्शन, शक्ति सदन का किया घेराव

पंजाब में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने मंगलवार को जालंधर स्थित शक्ति सदन के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश चंद्र शर्मा ने किया। बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि लगातार बिजली कटौती के कारण खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग भी अघोषित बिजली कटों से परेशान हैं।

धरने के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि धान की फसल के लिए इस समय पर्याप्त सिंचाई की जरूरत है, लेकिन समय पर बिजली नहीं मिलने से फसल प्रभावित हो रही है। किसानों ने आरोप लगाया कि कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली गुल रहने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को भी गर्मी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) पूरे पंजाब में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल किसानों का नहीं बल्कि आम जनता का भी मुद्दा है, इसलिए सरकार को तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बिजली विभाग के अधिकारियों को मांग पत्र भी सौंपा और जल्द समाधान की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

वहीं बिजली विभाग ने किसानों के आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। नॉर्थ रीजन के चीफ इंजीनियर सरबजीत सिंह ने बताया कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने सेंट्रल पूल से निर्धारित सीमा से 300 से 400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदी है, ताकि आपूर्ति को बेहतर बनाया जा सके।

चीफ इंजीनियर ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण इस समय बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि धान की बुआई के मौसम को देखते हुए किसानों को प्रतिदिन आठ घंटे या उससे अधिक बिजली उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक बिजली कट लगाए जा रहे हैं। यही व्यवस्था पूरे पंजाब में लागू की गई है ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हों।

बिजली विभाग का कहना है कि शहरों और गांवों में कहीं-कहीं बिजली कटौती बढ़ी हुई मांग के कारण की जा रही है। विभाग लगातार अधिकतम बिजली खरीदकर आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जहां बिजली की मांग उपलब्ध आपूर्ति से अधिक हो जाती है, वहां सीमित समय के लिए कट लगाने पड़ते हैं। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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