उत्तराखण्डदेहरादून

उत्तराखंड में मानसून अलर्ट: सड़कें बंद, हेली एम्बुलेंस और अस्पताल हाई अलर्ट पर, स्वास्थ्य विभाग की बड़ी तैयारी

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं ने एक बार फिर जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पर्वतीय जिलों में कई सड़कें बंद होने, गांवों का संपर्क टूटने और आपदा की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। मरीजों तक समय पर इलाज पहुंचाने के लिए हेली एम्बुलेंस, आपदा राहत हेलीकॉप्टर, 108 एम्बुलेंस और जिला अस्पतालों को विशेष तैयारियों के निर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मानसून के दौरान दूरस्थ इलाकों में सड़कें बंद होने से गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसी स्थिति में हेलीकॉप्टर और हेली एम्बुलेंस जीवनरक्षक साबित होते हैं। इसी कारण सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को आपदा प्रबंधन के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई है।

हेली एम्बुलेंस और 108 सेवा पर विशेष फोकस

विभाग ने राज्यभर की सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए सभी अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। मौसम अनुकूल होने पर गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट करने के लिए यूकाडा (UCADA) के साथ समन्वय बनाया गया है। यदि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सकता, तो मरीजों को तुरंत 108 और विभागीय एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

प्रदेशभर के अस्पतालों को अलर्ट

मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, उप-जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी को अलर्ट रखा गया है। अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और आपातकालीन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रमुख आंकड़े

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में वर्तमान समय में—

  • 274 विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हैं।
  • 1629 सामान्य चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं।
  • 891 फार्मेसी अधिकारी और 2349 नर्सिंग अधिकारी कार्यरत हैं।
  • 219 बड़े सरकारी अस्पताल संचालित हैं, जिनमें लगभग 6384 सामान्य एवं आईसीयू बेड उपलब्ध हैं।
  • 81 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और 579 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) कार्यरत हैं।
  • 59 बड़े निजी अस्पतालों में करीब 32 हजार से अधिक बेड उपलब्ध हैं।
  • 246 विभागीय एम्बुलेंस और 262 एम्बुलेंस (108 सेवा) मरीजों की सहायता के लिए तैयार रखी गई हैं।
  • प्रदेश में 45 ब्लड बैंक, 19 ट्रॉमा यूनिट और 12 बर्न यूनिट भी सक्रिय हैं।

दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों पर विशेष ध्यान

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि आपदा के समय सबसे अधिक परेशानी दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को होती है। ऐसे में मरीजों को “गोल्डन ऑवर” के भीतर इलाज उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से हेली एम्बुलेंस, आपदा हेलीकॉप्टर, 108 सेवा और स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाया गया है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने बताया कि मानसून सीजन को देखते हुए सभी जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और नियमित मॉक ड्रिल भी कराई जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर रेडक्रॉस, आईटीबीपी, एनसीसी और सेना के साथ भी समन्वय स्थापित किया जाएगा। वहीं यूकाडा अधिकारियों के अनुसार, पहले संचालित आपदा हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से लगभग 270 से अधिक आपातकालीन एयरलिफ्ट मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। वर्तमान में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में एक-एक हेलीकॉप्टर आपदा राहत के लिए तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Parvat Sankalp News