हरियाणा

पटवारी-कानूनगो की हड़ताल से बढ़ी मुश्किलें, सॉफ्टवेयर और संसाधनों को लेकर टकराव

राजस्व विभाग की डिजिटल व्यवस्था को लेकर पटवारी और कानूनगो दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने नए सॉफ्टवेयर और पोर्टल तो लागू कर दिए हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए जरूरी तकनीकी संसाधन अब भी पर्याप्त नहीं हैं। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों के साथ आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  पटवारियों के मुताबिक पुराने टैबलेट लंबे समय से इस्तेमाल के कारण खराब हो चुके हैं, जबकि नए उपकरण अभी तक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके अलावा नए पोर्टल में कई तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार सॉफ्टवेयर को दुरुस्त बता रही है, लेकिन जमीन पर काम करने वाले कर्मचारियों को रोजाना इसकी खामियों का सामना करना पड़ रहा है।

कर्मचारियों ने अब तकनीकी गड़बड़ियों को सामने लाने के लिए गलतियों वाले इंतकाल के उदाहरण जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति तभी स्पष्ट होगी, जब पोर्टल से तैयार होने वाले दस्तावेजों और रिकॉर्ड में सामने आ रही खामियों की जांच की जाए। कैथल में नए सॉफ्टवेयर की व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त खर्च का मामला भी सामने आया है। जमीन की खरीदारी करने वाले सुखविंद्र के अनुसार, पहले इंतकाल की प्रक्रिया में एक पेज निकलता था और करीब 25 रुपये का खर्च आता था। अब नए सॉफ्टवेयर में इसी प्रक्रिया के लिए 179 पेज निकलने की बात सामने आई है, जिससे खर्च बढ़कर करीब 4,475 रुपये तक पहुंच गया।

कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का मकसद राजस्व संबंधी काम को आसान, तेज और कम खर्चीला बनाना है। लेकिन यदि तकनीकी व्यवस्था के कारण दस्तावेजों की संख्या और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं, तो इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। यही वजह है कि एसोसिएशन सॉफ्टवेयर की तकनीकी क्षमता की वास्तविक जांच की मांग कर रही है। पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन ने सरकार के सामने एक सीधा प्रस्ताव भी रखा है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार नए सॉफ्टवेयर को पूरी तरह सही मानती है तो हर जिले से 25-25 ऐसे इंतकाल मंगवाए जाएं, जिनमें तकनीकी गलतियां सामने आई हैं। इन रिकॉर्ड की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि समस्या कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में है या सॉफ्टवेयर की तकनीकी व्यवस्था में। पटवारियों ने डिजिटल क्रॉप सर्वे की मौजूदा व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान में 20 मीटर की रेंज के कारण खेतों में फसल सर्वे करना कई जगह मुश्किल हो जाता है। उनकी मांग है कि इस रेंज को बढ़ाकर 150 मीटर किया जाए, ताकि मौके पर सर्वे करना आसान हो सके और कर्मचारियों को बार-बार अतिरिक्त दूरी तय न करनी पड़े।

एसोसिएशन ने बेहतर गुणवत्ता वाले टैबलेट और दूसरे जरूरी तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल कामकाज के लिए पर्याप्त और आधुनिक उपकरण उपलब्ध होना जरूरी है। खराब या पुराने उपकरणों के सहारे नई डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना मुश्किल है। इसके अलावा रेवेन्यू हरियाणा पोर्टल को और सरल बनाने की मांग की गई है। पटवारियों ने बायर डिटेल की ऑटो-फिल सुविधा शुरू करने की मांग रखी है, ताकि बार-बार एक जैसी जानकारी दर्ज करने की जरूरत कम हो। खेवट और हिस्से में दामालव से जुड़ी तकनीकी समस्या को दूर करने की मांग भी एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में शामिल है।

पटवारी और कानूनगो का कहना है कि वे डिजिटल व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो मैदानी स्तर पर आसानी से काम करे। कर्मचारियों के मुताबिक तकनीक तभी सफल होगी, जब सॉफ्टवेयर, उपकरण और पोर्टल की सुविधाएं वास्तविक कामकाज की जरूरतों के अनुरूप हों। फिलहाल हड़ताल के चलते राजस्व विभाग से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। अब निगाह सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि तकनीकी समस्याओं को दूर करने, नए उपकरण उपलब्ध कराने और पोर्टल को सरल बनाने पर सहमति बनती है, तो विवाद का समाधान निकल सकता है। वहीं, अगर मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो राजस्व सेवाओं पर इसका असर आगे भी देखने को मिल सकता है।

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