देहरादून। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले प्रसिद्ध निशानेबाज और शूटिंग कोच जसपाल राणा के आकस्मिक निधन से खेल जगत समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। 50 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर ने खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और उनके चाहने वालों को स्तब्ध कर दिया है। आज शनिवार को उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर देहरादून स्थित उनके आवास पर रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंच रहे हैं। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर वाराणसी ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आते ही उत्तराखंड सहित पूरे देश में शोक का माहौल है। उनके पैतृक गांव टटोर, नैनबाग और चिलामू क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग देहरादून पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों, खेल प्रेमियों और उनके शुभचिंतकों द्वारा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी जा रही है। लोगों का कहना है कि जसपाल राणा ने अपने खेल कौशल और उपलब्धियों से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत का गौरव बढ़ाया।
जानकारी के अनुसार जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप में भारतीय शूटिंग टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में शामिल हुए थे। प्रतियोगिता संपन्न होने के बाद जब वह म्यूनिख से नई दिल्ली लौट रहे थे, तभी फ्लाइट के दौरान उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ। विमान में मौजूद मेडिकल टीम और फ्लाइट क्रू ने उन्हें प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया, लेकिन उनकी तबीयत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार शुरू किया गया। चिकित्सकों ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए स्टेंट भी डाला, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर ने भारतीय खेल जगत को गहरा आघात पहुंचाया है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जन्मे जसपाल राणा बचपन से ही खेलों के प्रति समर्पित रहे। उनके पिता नारायण सिंह भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में सेवाएं दे चुके हैं। जसपाल राणा ने अपनी शिक्षा मसूरी और दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों से प्राप्त की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने निशानेबाजी में भी विशेष रुचि दिखाई और कम उम्र में ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
जसपाल राणा ने अपने शानदार करियर में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उन्हें भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिना जाता है। खेल जीवन के बाद उन्होंने कोच के रूप में भी नई प्रतिभाओं को तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। देहरादून में संचालित अपनी शूटिंग रेंज के माध्यम से वह आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देते थे। उनका मानना था कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती और सही मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकता है। उनके इस प्रयास से कई युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में सफल हुए। जसपाल राणा का निधन केवल खेल जगत की नहीं, बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके योगदान, उपलब्धियों और खेलों के प्रति समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा। आज वाराणसी में होने वाले अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में खिलाड़ी, खेल अधिकारी, राजनीतिक हस्तियां और उनके प्रशंसक शामिल होने की संभावना है।