देहरादून। देश की राष्ट्रपति एवं भारतीय सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड (पीओपी) में मुख्य अतिथि एवं समीक्षा अधिकारी के रूप में हिस्सा लिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने भारतीय सैन्य अकादमी के 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की शानदार पासिंग आउट परेड की समीक्षा की तथा सेना में शामिल होने जा रहे नवप्रशिक्षित अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। आईएमए के ऐतिहासिक चेटवुड ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित इस समारोह में सैन्य अनुशासन, परंपरा और देशभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। परेड में शामिल कैडेटों ने शानदार मार्च पास्ट और सैन्य कौशल का प्रदर्शन कर उपस्थित अतिथियों और परिजनों का मन मोह लिया। राष्ट्रपति ने परेड का निरीक्षण करते हुए कैडेटों के समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारतीय सेना के अधिकारी केवल देश की सीमाओं के रक्षक नहीं होते, बल्कि वे 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सम्मान और आकांक्षाओं के भी संरक्षक होते हैं। उन्होंने नवप्रशिक्षित अधिकारियों को कर्तव्यनिष्ठा, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और समर्पण की भावना के साथ देश सेवा करने का संदेश दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाना अब इन युवा अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस वर्ष की पासिंग आउट परेड कई मायनों में ऐतिहासिक रही। पहली बार भारतीय सैन्य अकादमी से 9 महिला कैडेट सफलतापूर्वक पास आउट होकर सैन्य अधिकारी बनीं। यह उपलब्धि भारतीय सेना में महिला सशक्तिकरण और बढ़ती भागीदारी का प्रतीक मानी जा रही है। राष्ट्रपति ने महिला अधिकारियों को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और महिला नेतृत्व को नई दिशा देगी।

परेड में कुल 481 भारतीय कैडेटों ने प्रशिक्षण पूर्ण कर सेना में अधिकारी के रूप में कदम रखा। इसके अलावा 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट भी भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त कर पास आउट हुए। राष्ट्रपति ने इसे भारत की मजबूत वैश्विक मित्रता, रक्षा सहयोग और सैन्य कूटनीति का सशक्त उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आईएमए आज विश्वस्तरीय सैन्य प्रशिक्षण संस्थान के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आधुनिक युद्ध तकनीकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति और नई चुनौतियों के दौर में भारतीय सेना को लगातार नवाचार, आधुनिकता और अनुकूलनशीलता के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करने, उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने और सैनिकों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि एक सफल सैन्य अधिकारी वही होता है जो अपने सैनिकों का विश्वास जीतते हुए सैन्य प्रभावशीलता और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखे। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि आज पास आउट हुए सभी अधिकारी भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्र की सुरक्षा, सम्मान और अखंडता की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य अकादमी के प्रशिक्षक, विभिन्न देशों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कैडेटों के परिजन मौजूद रहे। पासिंग आउट परेड के समापन के साथ ही युवा कैडेट भारतीय सेना के अधिकारी के रूप में अपने नए सफर की शुरुआत कर देश सेवा के लिए तैयार हो गए।