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मंगलौर और झबरेड़ा में ऊर्जा निगम की छापेमारी के खिलाफ भाकियू का आक्रोश, धरने पर बैठे किसान

मंगलौर और झबरेड़ा क्षेत्र में ऊर्जा निगम की छापेमारी को लेकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट (Bhartiya Kisan Uninon) ने आक्रोश जताया है। कार्रवाई के विरोध में भाकियू के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को मंगलौर स्थित बिजलीघर पर धरना दिया। इस दौरान ऊर्जा निगम के कर्मचारी दफ्तर छोड़कर निकल गए। इस दौरान किसानों ने जमकर नारेबाजी की।

सोमवार को ऊर्जा निगम की विजिलेंस टीम ने ग्राम थिथकी, गदरजुड़ा के अलावा झबरेड़ा क्षेत्र के ग्राम टिकोला और मानकपुर आदमपुर में बिजली चोरी को लेकर छापेमारी की थी। ग्रामीणों ने ऊर्जा निगम की विजिलेंस टीम को बंधक बना लिया था। इस दौरान जमकर हंगामा हुआ था। बवाल बढ़ता देख पीएसी की टीम ने लाठियां फटकारते हुए टीम को छुड़ाया। ऊर्जा निगम की टीम ने बिजली चोरी के मामले में 110 लोगों के खिलाफ तहरीर दी थी।

भाकियू बिजलीघर पहुंचा और धरने पर बैठ गया

इसके विरोध में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता मंगलौर कस्बा स्थित बिजलीघर पहुंचे और धरना देकर बैठ गए। किसानों ने नारेबाजी करते हुए ऊर्जा निगम के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का रुख देख बिजलीघर के कर्मचारी दफ्तर छोड़कर वहां से खिसक लिए। इस मौके पर किसानों ने कहा कि ऊर्जा निगम और सरकार किसानों पर डंडा चलाने का काम कर रही है, जबकि किसान अपनी लागत से भी कम मूल्य पर फसल पैदा करते हुए सभी का पेट पालने में लगे हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों का शोषण बंद किया जाए। इसे किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों ने सरकार से मुफ्त बिजली दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसानों का धरना जारी रहेगा।

इस मौके पर संजय चौधरी, चौधरी रवि कुमार, कुलदीप, सचिन, बबली, राजकुमार, भूपेंद्र, नीटू, प्रेम, अरविंद, धर्मेंद्र, संजीव आदि किसान मौजूद थे।

विभाग खून बेचकर वसूल करे बिल – किसान

बिजलीघर पर धरना देते हुए किसानों ने कहा कि ऊर्जा निगम गरीब किसानों पर ही कार्रवाई रहा है, जबकि उद्योगपितयों के यहां पर कार्रवाई से इन्हें डर लगता है। किसानों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। किसानों के पास भेजे गए गलत बिल का भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है।

किसानों ने कहा कि वह गलत बिल का भुगतान अपने खून से करेगा। धरने पर बैठे किसानों ने सिरिंज से खून निकालकर इसे एक ग्लास में रख दिया। साथ ही बिजलीघर के कार्यालय पर रखी बेंच पर पर्चे भी चस्पा किए। जिसमें लिखा कि ऊर्जा निगम किसान और रुपये नहीं दे सकते। वह अपना खून दे रहे हैं। ऊर्जा निगम के अधिकारी खून बेचकर बिल वसूल करे।

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