चंपावत: उत्तराखंड में शासन को देहरादून से बाहर दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अहम पहल की है। भारत-नेपाल सीमा से सटे चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। चंपावत जिले में पहली बार हुई इस कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने युवाओं, वन भूमि, स्थानीय निकायों, कर्मचारियों, पशुपालन और आधारभूत ढांचे से जुड़े कई मामलों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए। मुख्यमंत्री धामी ने बैठक के बाद कहा कि अब कैबिनेट की बैठकें केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी। प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में भी मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि स्थानीय समस्याओं, क्षेत्रीय जरूरतों और विकास की संभावनाओं को शासन के स्तर पर सीधे समझा जा सके।
वन भूमि के मामलों के लिए PMU का गठन
कैबिनेट ने वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए नोडल अधिकारी, वन संरक्षण, उत्तराखंड के कार्यालय में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) गठित करने को मंजूरी दी। इसके लिए छह पद भी स्वीकृत किए गए हैं। यह व्यवस्था वन भूमि हस्तांतरण के तकनीकी परीक्षण और ऑनलाइन आरेखन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
भूमिधरी अधिकार और भूमि विनियमितीकरण को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों एवं कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने से संबंधित प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई। इसके तहत नैनीताल जिले के नगर पंचायत लालकुआं के संबंधित पट्टेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार दिए जाने का रास्ता साफ किया गया है। वहीं देहरादून के परगना डोईवाला-रिस्पना क्षेत्र में वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण से जुड़े प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। संबंधित भूमि का विनियमितीकरण एक वर्ष के लिए वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद यह प्रक्रिया वर्तमान प्रचलित सर्किल रेट के अनुसार होगी।
पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार के लिए ₹66.29 करोड़ जारी करने की मंजूरी
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तार से संबंधित हस्तांतरित परिसंपत्तियों के मामले में उत्तराखंड ट्रेड एंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को ₹66.2916 करोड़ की शेष धनराशि जारी करने को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। यह धनराशि कॉरपोरेशन की कार्ययोजना के तहत नवनिर्माण और अन्य निर्धारित कार्यों में इस्तेमाल की जाएगी।
संपत्ति खरीद-बिक्री में PAN Verification अनिवार्य व्यवस्था
स्टाम्प एवं निबंधन विभाग के अंतर्गत संपत्तियों की खरीद-बिक्री से जुड़े लेन-देन में क्रेता, विक्रेता और अन्य संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए PAN की PAN Verification व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। इसका उद्देश्य संपत्ति संबंधी लेन-देन में दस्तावेजी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाना है। वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही वित्तीय एवं बजटीय व्यवस्था से जुड़े नियमों में आवश्यक संशोधन का रास्ता साफ हुआ है।
वन विभाग में विभागाध्यक्षों की व्यवस्था बदलेगी
वन विभाग के विभागाध्यक्ष से संबंधित व्यवस्था में भी संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत निदेशक, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व को विभागाध्यक्षों की सूची से हटाया जाएगा। वहीं मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं, उत्तराखंड, नैनीताल और मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल, उत्तराखंड, पौड़ी को विभागाध्यक्ष घोषित किया जाएगा।
छठे राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में रखी जाएगी
मंत्रिमंडल ने छठवें राज्य वित्त आयोग, उत्तराखंड की पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की मंजूरी दी। आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए राज्य के शुद्ध कर राजस्व से स्थानीय निकायों को होने वाले हस्तांतरण सहित वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर अपनी सिफारिशें दी हैं।
आपराधिक मामलों में सहायक लोक अभियोजक की व्यवस्था
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 19(3) के प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करने को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसके तहत निर्धारित परिस्थितियों में जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार को 14 दिन की सूचना देने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को संबंधित मामले में सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेंगे।
सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी नियमावली में संशोधन
राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली में भी बदलाव को मंजूरी मिली है। उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 के तहत कर्मचारियों की चल-अचल और बहुमूल्य संपत्तियों से जुड़े प्रावधानों को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप स्पष्ट एवं अद्यतन किया जाएगा। नियम 15 के हिंदी अनुवाद में मौजूद त्रुटि को भी ठीक किया जाएगा। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के बाद वर्ष 1965 की संबंधित अधिसूचना में आवश्यक धारागत संशोधन को भी मंजूरी दी गई।
समूह ‘ग’ के आरक्षण नियमों में संशोधन
राज्य अधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों पर आरक्षण प्रक्रिया से संबंधित विखण्डन (संशोधन) नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। साथ ही उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के कार्यक्षेत्र से जुड़े संशोधन को भी स्वीकृति मिली। इसके तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को लोक सेवा आयोग के परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा, क्योंकि सेवा नियमावली के अनुसार यह राजपत्रित समूह ‘ख’ का पद है।
पुलिस ढांचे में 11 पद होंगे समर्पित
कैबिनेट ने तत्कालीन अधिष्ठान, उत्तराखंड के ढांचे के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत 8 आरक्षी न.पु., एक आरक्षी डाक रनर और दो आरक्षी चालक, यानी कुल 11 पद समर्पित किए जाएंगे।
निवेश और आधारभूत संरचना से जुड़े प्रावधान में बदलाव
नियोजन विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 49 के तहत अनुसूची-3 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। संशोधन के अनुसार संबंधित अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश या मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित अभिकरणों को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
पुराने नहर एवं जल निकासी कानून की जगह नया विधेयक
कैबिनेट ने उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873 को वर्तमान परिस्थितियों में अप्रासंगिक अथवा अपर्याप्त मानते हुए निरस्त करने का निर्णय लिया है। इसके स्थान पर राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026 को विधानसभा के पटल पर रखने की मंजूरी दी गई है।
कुक्कुट पालकों को DBT से मिलेगी सब्सिडी
कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना के लाभार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। अब सब्सिडी का भुगतान मौजूदा CBDC/e-RUPI आधारित व्यवस्था की जगह आधार सीडेड या लिंक्ड बैंक खाते के माध्यम से DBT के जरिए किया जाएगा। इससे लाभार्थियों तक सब्सिडी सीधे पहुंचाने की व्यवस्था को और सरल बनाया जा सकेगा।
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभागों के लिए नया महानिदेशक पद
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों के बीच बेहतर समन्वय, निगरानी और प्रशासनिक एकरूपता के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित करने को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। सरकार का मानना है कि इससे केंद्र और राज्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुश्रवण और बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।
सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचेगा शासन: CM धामी
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित करने का उद्देश्य शासन को जनता के और करीब ले जाना है। इससे स्थानीय परिस्थितियों, जन अपेक्षाओं और क्षेत्र विशेष की विकास आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं हैं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सड़क, कनेक्टिविटी, रोजगार, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार काम किया जा रहा है। धामी ने कहा कि कैबिनेट बैठकों को प्रदेश के विभिन्न जिलों तक ले जाने से क्षेत्रीय विषयों पर त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने में मदद मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि शासन और जनता के बीच की दूरी कम हो और विकास योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचे।
कैबिनेट मंत्रियों को भेंट की गई पारंपरिक फर्रा/छन्तोली
बनबसा में आयोजित इस विशेष कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्रिमंडल के सदस्यों को चंपावत की समृद्ध लोक परंपरा से जुड़ी ‘फर्रा/छन्तोली’ भेंट की गई। यह पारंपरिक ढाल देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी हुई है। इसे मुख्य रूप से बांस या रिंगाल की खपच्चियों से छतरीनुमा आकार में तैयार किया जाता है। कैबिनेट सदस्यों को यह पारंपरिक धरोहर भेंट करना सीमांत चंपावत की लोक संस्कृति, परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के सम्मान का प्रतीक रहा।