SIR के बाद उत्तराखंड में बदला वोटर गणित, 11 लाख से ज्यादा मतदाता घटे; 2027 चुनाव से पहले नई सियासी चुनौती – Parvat Sankalp News

SIR के बाद उत्तराखंड में बदला वोटर गणित, 11 लाख से ज्यादा मतदाता घटे; 2027 चुनाव से पहले नई सियासी चुनौती

देहरादून: उत्तराखंड में Special Intensive Revision (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ ही 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश का चुनावी गणित काफी बदल गया है। वर्ष 2022 की विधानसभा चुनाव वाली मतदाता सूची की तुलना में अब प्रदेश में 11 लाख 7 हजार 695 मतदाता कम दर्ज हैं। सबसे बड़ा बदलाव देहरादून जिले की धर्मपुर विधानसभा सीट पर देखने को मिला है, जहां 57 हजार से अधिक मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, 2022 और 2026 की मतदाता सूचियों के बीच का पूरा अंतर सीधे तौर पर SIR के दौरान काटे गए नामों के रूप में नहीं देखा जा सकता। SIR प्रक्रिया में सत्यापन, नाम हटाने और नए मतदाताओं को जोड़ने समेत कई चरण शामिल रहे हैं। इसलिए अंतिम आंकड़ा दोनों सूचियों के बीच का कुल अंतर दर्शाता है।

82.66 लाख से घटकर 71.58 लाख हुई संख्या

2022 विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड में कुल 82 लाख 66 हजार 644 मतदाता दर्ज थे। वहीं SIR प्रक्रिया के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 71 लाख 58 हजार 949 रह गई है। इस तरह दोनों सूचियों के बीच कुल 11 लाख 7 हजार 695 मतदाताओं का अंतर सामने आया है। यह बदलाव प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

70 में से 69 सीटों पर घटे मतदाता

विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 70 में से 69 विधानसभा सीटों पर वर्ष 2022 की तुलना में मतदाता संख्या कम हुई है। केवल हरिद्वार जिले की ज्वालापुर विधानसभा सीट ऐसी है, जहां 2022 के मुकाबले 73 मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सबसे अधिक कमी वाले विधानसभा क्षेत्रों में देहरादून की धर्मपुर सीट सबसे ऊपर है। इसके अलावा कैंट, रायपुर, राजपुर रोड और ऋषिकेश जैसी सीटों पर भी 30 हजार से अधिक मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है।

देहरादून में धर्मपुर सबसे ज्यादा प्रभावित

देहरादून जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों में मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

  • चकराता: 2,066 मतदाता कम
  • विकासनगर: 7,714 कम
  • सहसपुर: 12,608 कम
  • धर्मपुर: 57,318 कम
  • रायपुर: 39,989 कम
  • राजपुर रोड: 39,046 कम
  • कैंट: 46,346 कम
  • मसूरी: 34,113 कम
  • डोईवाला: 20,240 कम
  • ऋषिकेश: 43,299 कम

इन आंकड़ों से साफ है कि देहरादून की मैदानी और शहरी विधानसभा सीटों में मतदाता सूची में बड़ा बदलाव आया है।

काशीपुर, हरिद्वार और रुड़की में भी बड़ी कमी

देहरादून के अलावा प्रदेश की कई प्रमुख मैदानी सीटों पर भी मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट सामने आई है। काशीपुर विधानसभा क्षेत्र में 41,281, हरिद्वार में 39,553, रुड़की में 31,989, रानीपुर में 32,129, हल्द्वानी में 31,294 और बाजपुर में 23,017 मतदाता कम हुए हैं। इन सीटों पर पिछले विधानसभा चुनावों में मुकाबला काफी महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में मतदाता सूची में आया यह बदलाव राजनीतिक दलों के लिए बूथ स्तर पर नए सिरे से रणनीति तैयार करने की जरूरत पैदा कर सकता है।

ऊधम सिंह नगर में भी बदला चुनावी आंकड़ा

ऊधम सिंह नगर जिले की विधानसभा सीटों पर भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। काशीपुर में 41,281 और बाजपुर में 23,017 मतदाताओं की कमी के अलावा किच्छा में 21,236, रुद्रपुर में 19,552, जसपुर में 17,566, खटीमा में 12,919, नानकमत्ता में 12,857, गदरपुर में 8,848 और सितारगंज में 5,200 मतदाता कम हुए हैं।

पहाड़ी सीटों पर भी हजारों मतदाताओं की कमी

मतदाता सूची में बदलाव का असर केवल मैदानी विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा है। पहाड़ की कई सीटों पर भी हजारों मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। टिहरी विधानसभा में 18,329, लैंसडाउन में 19,937, चौबट्टाखाल में 16,933, पौड़ी में 16,118, श्रीनगर में 14,367, द्वाराहाट में 14,016, सल्ट में 14,396, नरेंद्रनगर में 12,998 और बदरीनाथ में 13,240 मतदाता कम हुए हैं। उत्तरकाशी जिले की तीनों विधानसभा सीटों में भी कमी दर्ज की गई है। गंगोत्री में 11,320, यमुनोत्री में 2,583 और पुरोला में 983 मतदाता कम हुए हैं। चमोली जिले में बदरीनाथ में 13,240, थराली में 8,394 और कर्णप्रयाग में 11,643 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है। वहीं रुद्रप्रयाग सीट पर 9,337 मतदाता कम हुए हैं।

2027 चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की बढ़ी चुनौती

मतदाता सूची में आए इस बड़े बदलाव को 2027 विधानसभा चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धर्मपुर, कैंट, ऋषिकेश, रायपुर, राजपुर रोड, काशीपुर, हरिद्वार और रुड़की जैसी सीटों पर 30 हजार से अधिक मतदाताओं का अंतर सामने आया है। अब राजनीतिक दलों को वर्ष 2022 के बूथवार मतदान आंकड़ों और मौजूदा मतदाता सूची का नए सिरे से मिलान करना होगा। इससे बूथ स्तर पर मतदाताओं की संख्या, मतदान प्रतिशत और संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों का आकलन भी बदल सकता है। हालांकि, केवल मतदाता संख्या में कमी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि किसी एक राजनीतिक दल को सीधे तौर पर फायदा या नुकसान हुआ है। चुनावी प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि हटाए गए या जुड़े मतदाताओं का भौगोलिक और सामाजिक वितरण किस तरह का है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

SIR के बाद मतदाता सूची में हुए बदलाव को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट ने आरोप लगाया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के जरिए चुनाव में गड़बड़ी की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार बनाएगी। कांग्रेस के इन आरोपों को पार्टी के राजनीतिक रुख के तौर पर देखा जाना चाहिए। मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक निर्वाचन प्रक्रिया और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

भाजपा ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का किया बचाव

वहीं भाजपा के उत्तराखंड मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई का बचाव किया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में किए गए बदलाव निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। भाजपा का कहना है कि सत्यापन के दौरान दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके लोगों, मृत मतदाताओं और ऐसे नामों को सूची से हटाया गया है जो पात्रता के मानकों के अनुरूप नहीं थे। पार्टी ने SIR प्रक्रिया को पारदर्शी और आवश्यक प्रक्रिया बताया है।

अब नए वोटर गणित पर होगी 2027 की तैयारी

SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के सामने एक नया डेटा सेट रख दिया है। 11 लाख से अधिक मतदाताओं के अंतर के बाद अब पार्टियां बूथ स्तर पर अपने पुराने चुनावी आंकड़ों की नए मतदाता डेटा के साथ समीक्षा कर सकती हैं। हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक चुनावी असर 2027 के मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों का वोटर गणित 2022 के मुकाबले काफी बदल चुका है, और यही बदलाव आने वाले महीनों में राजनीतिक दलों की रणनीति का अहम आधार बन सकता है।

 

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