रुद्रपुर में धान खरीद शुरू न होने पर किसानों का हंगामा, हाईवे जाम; 1600-1700 रुपये में फसल बेचने का आरोप – Parvat Sankalp News

रुद्रपुर में धान खरीद शुरू न होने पर किसानों का हंगामा, हाईवे जाम; 1600-1700 रुपये में फसल बेचने का आरोप

रुद्रपुर: ऊधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर में सरकारी धान खरीद व्यवस्था शुरू नहीं होने से किसानों का गुस्सा मंगलवार को सड़क पर उतर आया। गल्ला मंडी में धरने के बाद जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने हाईवे की एक लेन पर बैठकर जाम लगा दिया। किसानों का आरोप है कि धान की कटाई शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं और बड़ी मात्रा में फसल मंडियों तक पहुंच रही है, लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद व्यवस्था अभी तक पूरी तरह सुचारू नहीं हो पाई है। हाईवे जाम होने के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई स्कूली बसें, ट्रक और अन्य वाहन भी जाम में फंस गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और किसानों से बातचीत कर जाम खुलवाने का प्रयास किया।

सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों में आक्रोश

रुद्रपुर गल्ला मंडी में बड़ी संख्या में किसान धान की सरकारी खरीद तत्काल शुरू कराने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। किसानों का कहना था कि वे कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों के अनुसार, उन्होंने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी या किसी अन्य सक्षम प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और ज्ञापन लेने की मांग की थी। काफी इंतजार के बाद भी जब कोई अधिकारी किसानों की समस्याएं सुनने नहीं पहुंचा तो उनका आक्रोश बढ़ गया। इसके बाद किसान मंडी से बाहर निकलकर हाईवे पर पहुंच गए और एक साइड की सड़क पर बैठकर यातायात रोक दिया।

सीओ ने समझाने की कोशिश की, मांग पर अड़े किसान

हाईवे जाम की सूचना पर पुलिस क्षेत्राधिकारी विभव सैनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने और यातायात बहाल कराने का प्रयास किया। हालांकि किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू कराने को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

किसानों का दावा- करीब 50 फीसदी धान बाजार में पहुंचा

किसानों का कहना है कि जिले में धान की कटाई तेजी से चल रही है और अब तक करीब 50 प्रतिशत धान बाजार में पहुंच चुका है। इसके बावजूद सरकारी खरीद केंद्रों पर प्रक्रिया पूरी तरह शुरू नहीं होने से किसानों के सामने फसल बेचने का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि कहीं पोर्टल से जुड़ी समस्या बताई जा रही है तो कहीं श्रमिकों की कमी का हवाला देकर सरकारी खरीद को आगे बढ़ाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के बाद उसे लंबे समय तक रोककर रखना उनके लिए संभव नहीं है।

1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल में धान बेचने का आरोप

किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद व्यवस्था सुचारू नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी व्यापारियों का रुख करना पड़ रहा है। किसानों के मुताबिक निजी व्यापारी उन्हें करीब 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर धान खरीदने की पेशकश कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कम कीमत पर फसल बेचने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि यदि सरकारी क्रय केंद्र समय पर सक्रिय होते तो उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य हासिल करने में मदद मिलती।

प्रशासन को दी दूसरी लेन जाम करने की चेतावनी

आंदोलन कर रहे किसान नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 15 से 20 मिनट के भीतर कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत नहीं करता और सरकारी धान खरीद शुरू कराने को लेकर ठोस आश्वासन नहीं देता है, तो हाईवे की दूसरी साइड भी जाम कर दी जाएगी। किसानों के इस ऐलान के बाद पुलिस बल को मौके पर तैनात रखा गया और अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी।

किसान नेताओं ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सलविंदर सिंह कलसी, तराई संघ किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह विर्क और किसान नेता ठाकुर जगदीश सिंह ने कहा कि किसानों की मांग कोई नई नहीं है। उनका कहना है कि किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल का उचित मूल्य चाहते हैं और सरकार को सरकारी खरीद व्यवस्था तत्काल प्रभावी तरीके से शुरू करनी चाहिए। किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर आ रही पोर्टल संबंधी समस्याओं को दूर करने, पर्याप्त श्रमिकों की व्यवस्था करने और सभी केंद्रों पर धान खरीद तत्काल शुरू कराने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल धान खरीद को लेकर रुद्रपुर में किसानों का विरोध प्रदर्शन प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

 

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