राजपुर रोड में खजान दास बनाम राजकुमार, 2027 में किसका राज? 15 हजार वोटरों की कमी ने बदला चुनावी गणित – Parvat Sankalp News

राजपुर रोड में खजान दास बनाम राजकुमार, 2027 में किसका राज? 15 हजार वोटरों की कमी ने बदला चुनावी गणित

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की राजपुर रोड (अनुसूचित जाति आरक्षित) विधानसभा सीट आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर सियासी चर्चाओं के केंद्र में है। इस सीट की राजनीति लंबे समय से भाजपा के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री खजान दास तथा कांग्रेस के पूर्व विधायक राजकुमार के बीच मुकाबले के इर्द-गिर्द घूमती रही है। राजपुर रोड की खासियत यह है कि यहां देहरादून के पॉश और शहरी इलाकों के साथ-साथ रिस्पना नदी के आसपास बसी बस्तियों का बड़ा मतदाता वर्ग भी मौजूद है। यही सामाजिक और भौगोलिक विविधता इस सीट के चुनावी समीकरणों को बेहद दिलचस्प बनाती है।

2022 में 11 हजार से ज्यादा वोट से जीते थे खजान दास

2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा के खजान दास ने कांग्रेस के राजकुमार को 11,163 वोटों के अंतर से हराया था। अब SIR के बाद सामने आए मतदाता आंकड़ों के मुताबिक राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र में 15,364 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है। यानी मतदाताओं की संख्या में आया यह अंतर पिछली जीत के अंतर से भी बड़ा है। हालांकि केवल मतदाता संख्या में कमी के आधार पर किसी प्रत्याशी के पक्ष या विपक्ष में चुनावी नतीजे का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगा, लेकिन इतना जरूर है कि बदली मतदाता सूची के बाद दोनों प्रमुख दलों को अपने बूथ स्तर के पुराने आंकड़ों का नए सिरे से आकलन करना होगा। ऐसे में 2027 में सवाल यही है कि क्या खजान दास लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंचकर हैट्रिक लगाएंगे या राजकुमार वापसी करते हुए कांग्रेस का कब्जा वापस हासिल करेंगे?

मंत्री बनने के बाद खजान दास के सामने बढ़ीं उम्मीदें

खजान दास का राजनीतिक सफर संगठन के निचले स्तर से शुरू होकर विधायक और फिर कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा है। धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के बाद उन्हें समाज कल्याण जैसे सीधे तौर पर आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। मंत्री के तौर पर पेंशन और समाज कल्याण योजनाओं में पारदर्शिता तथा व्यवस्थाओं को बेहतर करने पर उनके काम को राजनीतिक रूप से भी देखा जा रहा है। पार्टी संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण भाजपा के अंदर भी उनका मजबूत नेटवर्क माना जाता है। राजपुर रोड, जाखन और ईसी रोड जैसे शहरी और मध्यवर्गीय क्षेत्रों में भाजपा का पारंपरिक समर्थन उनके लिए महत्वपूर्ण आधार है। लेकिन लगातार विधायक रहने और अब कैबिनेट मंत्री होने के कारण क्षेत्र की जनता की अपेक्षाएं भी पहले के मुकाबले बढ़ी हैं।

ट्रैफिक, सड़क और बस्तियों के मुद्दे बन सकते हैं परीक्षा

राजपुर रोड क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था, सड़क चौड़ीकरण, पेयजल, बस्तियों से जुड़े मुद्दे और विकास कार्य चुनाव में महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं। वहीं, कुछ समय पहले भाजपा से जुड़े लोगों की ओर से खजान दास पर SCSP और STSP योजनाओं के आवंटन में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया। हालांकि ऐसे आरोपों की वास्तविकता संबंधित जांच या आधिकारिक निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी, लेकिन चुनावी राजनीति में इस तरह के मुद्दे विपक्ष के लिए सरकार और स्थानीय विधायक को घेरने का आधार बन सकते हैं।

राजकुमार की सबसे बड़ी ताकत जमीनी संपर्क

कांग्रेस के पूर्व विधायक राजकुमार राजपुर रोड की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चेहरा हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की थी और इसके बाद भी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए रखी। उनकी राजनीति का एक बड़ा आधार स्थानीय जनसंपर्क और बस्तियों में रहने वाले लोगों के साथ सीधा संवाद माना जाता है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यक्रमों और स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी मौजूदगी लगातार दिखाई देती रही है। कांग्रेस की रणनीति क्षेत्र में पेयजल संकट, ट्रैफिक, बस्तियों के नियमितीकरण और विकास कार्यों में देरी जैसे मुद्दों को चुनावी बहस का हिस्सा बनाने की हो सकती है। हालांकि राजकुमार के सामने चुनौती भी कम नहीं है। 2017 और 2022 में लगातार हार के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना और मतदाताओं के बीच दोबारा मजबूत भरोसा कायम करना उनके लिए अहम होगा। इसके अलावा पार्टी के भीतर उभरते युवा और नए दलित चेहरे भी टिकट की दावेदारी को प्रभावित कर सकते हैं।

SC आरक्षित सीट पर दलित वोट सबसे अहम

राजपुर रोड विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। ऐसे में वाल्मीकि, जाटव और शिल्पकार समाज का वोट चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इन समुदायों के बीच अपना आधार मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं। वहीं राजपुर रोड के पॉश और मध्यवर्गीय इलाकों में रहने वाले पंजाबी, गढ़वाली और गोरखा समुदाय भी चुनावी रुझान को प्रभावित कर सकते हैं। रिस्पना नदी के आसपास की बस्तियों को पारंपरिक तौर पर कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में गिना जाता रहा है। हालांकि भाजपा ने केंद्र और राज्य सरकार की राशन, पेंशन तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के जरिए इन क्षेत्रों में अपना समर्थन बढ़ाने की कोशिश की है।

बसपा और आप भी बिगाड़ सकते हैं समीकरण

राजपुर रोड का चुनाव केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं है। बसपा और आम आदमी पार्टी जैसे दल भी वोटों का समीकरण प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। 2017 में बसपा को करीब 2,000 वोट मिले थे। वहीं 2022 में उसका वोट शेयर एक प्रतिशत से भी नीचे चला गया। इसके बावजूद आरक्षित सीट होने के कारण बसपा का प्रत्याशी कुछ क्षेत्रों में दलित वोटों को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 4,127 वोट हासिल किए थे। यदि 2027 में आप अपना वोट आधार बनाए रखने या बढ़ाने में सफल रहती है तो वह भाजपा-कांग्रेस के बीच करीबी मुकाबले में वोट कटवा की भूमिका निभा सकती है।

टिकट को लेकर दोनों खेमों में चुनौती

2027 चुनाव से पहले खजान दास के सामने सिर्फ विपक्ष ही चुनौती नहीं है। भाजपा के भीतर भी स्थानीय स्तर पर टिकट को लेकर दावेदारी सामने आ सकती है। पार्टी के स्थानीय पार्षदों और एससी मोर्चा से जुड़े पदाधिकारियों की संभावित दावेदारी चुनाव से पहले समीकरण बदल सकती है। वहीं कांग्रेस में भी राजकुमार के साथ-साथ युवा कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़े नए दलित चेहरों की दावेदारी चर्चा में आ सकती है। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रत्याशी चयन बेहद महत्वपूर्ण होगा।

2027 में किसके पक्ष में खुलेगा वोटों का खजाना?

राजपुर रोड विधानसभा में 2027 का चुनाव कई स्तरों पर दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ खजान दास का मंत्री पद, भाजपा का मजबूत संगठन और पारंपरिक वोट बैंक है, तो दूसरी तरफ राजकुमार की जमीनी सक्रियता और कांग्रेस का स्थानीय आधार। इसके बीच बदली मतदाता सूची, 15 हजार से अधिक मतदाताओं की कमी, दलित वोटों का विभाजन, बसपा-आप की मौजूदगी और स्थानीय मुद्दे चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2022 में खजान दास ने 11,163 वोट के अंतर से जीत हासिल की थी। अब 2027 में उनके सामने उस जीत को और मजबूत करने की चुनौती होगी। वहीं राजकुमार के लिए यह चुनाव राजनीतिक वापसी का बड़ा मौका हो सकता है। सवाल यही है—राजपुर रोड में खजान दास लगाएंगे जीत की हैट्रिक या राजकुमार करेंगे सत्ता में वापसी? इसका जवाब 2027 के चुनावी मैदान में मतदाता ही तय करेंगे।

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