मंत्री सुबोध उनियाल का राहुल गांधी पर हमला, बोले- ‘डरो मत, भागो मत, चर्चा में आइए’
छात्र मुद्दों को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- संसद में चर्चा से पीछे हट रहा विपक्ष

देहरादून। छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुबोध उनियाल ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार, 11 अगस्त को देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में उनियाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्र हितों के नाम पर राजनीति कर रही है और संसद में चर्चा का अवसर मिलने पर पीछे हट जाती है।
राहुल गांधी पर दोहरी राजनीति का आरोप
सुबोध उनियाल ने कहा कि राहुल गांधी खुद को छात्रों का हितैषी बताते हैं, लेकिन जब छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा का अवसर आता है तो विपक्ष उससे बचने की कोशिश करता है। उन्होंने कांग्रेस पर देश में नकारात्मक और अराजक माहौल बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए लगातार सरकार पर हमलावर है। मंत्री ने दावा किया कि लंबे समय से चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के कारण कांग्रेस और राहुल गांधी राजनीतिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं के पालन की अपेक्षा की जाती है।
NEET मुद्दे को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना
उनियाल ने NEET से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने पहले शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में गतिरोध पैदा किया। उनके मुताबिक, बाद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद NEET पर चर्चा की मांग उठाई गई। उनियाल का आरोप है कि जब सरकार ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अपनी तैयारी दिखाई, तब विपक्ष की ओर से चर्चा से पीछे हटने का रुख अपनाया गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को आरोप लगाने के बजाय संसद में चर्चा के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए।
‘छात्रों को भड़काने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी’
कैबिनेट मंत्री ने राहुल गांधी पर छात्रों के आंदोलन को लेकर बयानबाजी के जरिए माहौल को गर्म करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्र आंदोलन के संदर्भ में राहुल गांधी की ओर से गोली चलने जैसी बात कही गई, जिसे उन्होंने वास्तविक परिस्थितियों से अलग और सनसनी पैदा करने वाला बयान बताया। उनियाल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर बैठे व्यक्ति के बयानों की गंभीरता अधिक होती है, इसलिए उन्हें तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
सरकार ने छात्रों के हित में कदम उठाए: उनियाल
सुबोध उनियाल ने केंद्र सरकार की ओर से छात्रों और परीक्षाओं से जुड़े मामलों में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि NEET से जुड़े मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया और परीक्षा दोबारा आयोजित कराने समेत कई कदम उठाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षाओं में नकल और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। उनके मुताबिक, उत्तराखंड ने नकल विरोधी कानून लागू करने में पहल की और बाद में केंद्र स्तर पर भी परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए।
झारखंड के छात्र आंदोलन पर कांग्रेस को घेरा
प्रेस वार्ता के दौरान सुबोध उनियाल ने झारखंड में छात्रों के आंदोलन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि झारखंड में गठबंधन सरकार होने के बावजूद वहां छात्रों के साथ कथित कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी। उनियाल ने दावा किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए कंटीले तार लगाए गए और उनके साथ सख्ती की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस देश के अन्य हिस्सों में छात्र आंदोलनों को लेकर सरकार को घेरती है, तो झारखंड के मामले पर उसकी प्रतिक्रिया अलग क्यों है।
राहुल गांधी को दी ‘चर्चा’ की चुनौती
सुबोध उनियाल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें संसद में चर्चा से बचने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने के लिए तैयार है।
उन्होंने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि ‘डरो मत, भागो मत, चर्चा में आइए।’ उनियाल के मुताबिक, लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं बल्कि चर्चा और संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
‘संसद की कार्यवाही बाधित करना समाधान नहीं’
भाजपा नेता ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सरकार को जनहित के मुद्दों पर घेरने के साथ-साथ जनता की आवाज को मजबूती से उठाना भी है। उनके अनुसार, संसद की कार्यवाही बाधित करने के बजाय विपक्ष को बहस में शामिल होकर सरकार से जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार नए आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल को गरमाने का प्रयास कर रही है, जबकि भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा और संवाद के जरिए समस्याओं के समाधान के पक्ष में है।




