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हल्द्वानी: सीएम धामी का बड़ा निर्देश, अब धर्मस्थलों की क्षमतानुसार ही मिलेगा श्रद्धालुओं को प्रवेश

हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में हाल ही में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को धारणा क्षमता के अनुसार ही प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री पहुंचते हैं, वहां व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इनमें स्थलों का विस्तार, पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा मानकों का पालन शामिल है।

मुख्यमंत्री सोमवार को एफटीआई में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये व्यवस्थाएं मनसा देवी मंदिर सहित सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सख्ती से लागू की जाएंगी।

कुमाऊं के प्रमुख धार्मिक स्थल जहां भीड़ नियंत्रण जरूरी

  1. कैंची धाम (नैनीताल):
    बाबा नीब करौरी महाराज के आश्रम में रोजाना औसतन 10-12 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं। शनिवार और मंगलवार को यह संख्या 15-18 हजार तक पहुंच जाती है। 15 जून को आश्रम स्थापना दिवस पर यहां एक से डेढ़ लाख लोग पहुंचते हैं।
  2. जागेश्वर धाम (अल्मोड़ा):
    हिमालय की काशी के रूप में प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में 124 प्राचीन मंदिर हैं। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
  3. चितई गोलू मंदिर (अल्मोड़ा):
    घंटियों वाले इस प्रसिद्ध मंदिर में रोजाना 4-5 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। विशेष अवसरों पर यह संख्या 10 हजार से अधिक हो जाती है।
  4. हाट कालिका मंदिर (गंगोलीहाट):
    देवी कालिका को समर्पित यह मंदिर सैनिकों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि और पर्वों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है।
  5. पूर्णागिरी धाम (टनकपुर, चंपावत):
    यह एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जहां चैत्र नवरात्र में विशाल मेला लगता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
  6. गर्जिया मंदिर (रामनगर):
    कोसी नदी के टीले पर स्थित यह मंदिर कार्तिक पूर्णिमा, गंगा दशहरा, नवरात्र और शिवरात्रि के अवसरों पर श्रद्धालुओं से भर जाता है।

अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर सख्ती

मुख्यमंत्री धामी ने सरकारी जमीनों पर हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमणकारियों को विधिक नोटिस जारी कर स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया है, अन्यथा अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाएगा।

अब तक राज्य सरकार 7,000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड ने वर्ष 2023-24 के इंडेक्स में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में पहला स्थान प्राप्त किया है।

पंचायत चुनाव पर बोले मुख्यमंत्री

त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में लोगों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला है। मतदाताओं ने गांवों की सरकार चुनने में जागरूकता दिखाई, जिससे पहले चरण में मतदान प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका स्थानीय विकास में अहम होती है।

 

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