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यमुना को साफ करने की बड़ी तैयारी, IIT दिल्ली करेगा 29 STP की जांच

नई दिल्ली :-  दिल्ली में यमुना नदी के बढ़ते प्रदूषण और दुर्गंध की समस्या को कम करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी के 29 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की तकनीकी जांच अब आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी एसटीपी निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं और यमुना में जाने वाले अपशिष्ट जल का प्रभावी ढंग से शोधन हो रहा है। दिल्ली जल बोर्ड ने इस तकनीकी मूल्यांकन के लिए 17.70 लाख रुपये जारी किए हैं। साथ ही इस संबंध में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष एक हलफनामा भी प्रस्तुत किया गया है।

केंद्रीय समीक्षा बैठक के बाद लिया गया निर्णय

दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय दिसंबर 2025 में केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के निर्देशों के बाद लिया गया। इसके तहत सभी एसटीपी की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

इन बिंदुओं पर होगी विस्तृत जांच

आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञ टीम प्रत्येक एसटीपी का तकनीकी ऑडिट करेगी। जांच के दौरान निम्नलिखित पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा—

  • गंदे पानी के प्राथमिक और द्वितीयक शोधन की गुणवत्ता
  • जल को कीटाणुरहित (Disinfection) करने वाली प्रणाली की कार्यक्षमता
  • हानिकारक बैक्टीरिया और प्रदूषकों को हटाने की क्षमता
  • प्लांट से निकलने वाले स्लज (कीचड़) के निस्तारण की व्यवस्था
  • बायोगैस उत्पादन और प्रबंधन प्रणाली
  • पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालन

15 दिन में तैयार होगी रिपोर्ट

दिल्ली जल बोर्ड और आईआईटी दिल्ली के बीच हुए समझौते के अनुसार, किसी भी एसटीपी से पानी का नमूना लेने के 15 दिनों के भीतर उसकी जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि संबंधित प्लांट दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा निर्धारित मानकों का पालन कर रहा है या नहीं।

कमियां मिलने पर होगी कार्रवाई

अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में तकनीकी या संचालन संबंधी खामियां पाई जाती हैं, तो उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यमुना नदी में प्रदूषण के स्तर को कम करना और राजधानी की जल गुणवत्ता में सुधार लाना है।

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