पौड़ी में प्रसूता और नवजात की मौत से हड़कंप, निजी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप; जांच टीम गठित

पौड़ी: पौड़ी मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद प्रसूता और उसके नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आने के बाद शहर में आक्रोश का माहौल है। मृतका के पति ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कोतवाली में लिखित तहरीर दी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की टीम गठित की गई है। टीम अस्पताल में हुए उपचार, ऑपरेशन के बाद महिला की बिगड़ी हालत, रेफर करने की प्रक्रिया और चिकित्सा प्रोटोकॉल के पालन समेत पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी।
पति ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
मृतका के पति रजनीश लिंगवाल बीते दिन अपने परिजनों और बड़ी संख्या में शहरवासियों के साथ पौड़ी कोतवाली पहुंचे। उन्होंने पुलिस को लिखित तहरीर देकर मामले की जांच की मांग की। पति का आरोप है कि उनकी पत्नी का निजी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद उसकी हालत में लगातार गिरावट आती गई। परिजनों के मुताबिक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने उसे देहरादून रेफर कर दिया। रजनीश लिंगवाल का आरोप है कि यदि समय रहते उचित उपचार और आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती तो शायद उनकी पत्नी और नवजात बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
देहरादून पहुंचने के बाद प्रसूता ने तोड़ा दम
परिजनों के मुताबिक गर्भवती महिला का मंगलवार सुबह करीब 10:30 से 11 बजे के बीच निजी अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों का कहना है कि महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। इसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए देहरादून रेफर किया गया। देहरादून पहुंचने के बाद महिला का उपचार किया गया, लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी रही और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के साथ ही परिवार को एक और बड़ा सदमा लगा, क्योंकि नवजात शिशु की भी मौत हो गई। एक ही घटना में मां और नवजात दोनों की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है।
बड़ी संख्या में कोतवाली पहुंचे शहरवासी
घटना की जानकारी सामने आने के बाद पौड़ी के स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। मृतका के पति के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी कोतवाली पहुंचे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। लोगों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। शहरवासियों का कहना है कि पौड़ी में पहले से ही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की कमी है। गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को अक्सर देहरादून, ऋषिकेश या अन्य मैदानी शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर निजी अस्पताल शुरू होने से लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें गंभीर इलाज और प्रसूति संबंधी सुविधाओं के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन इस घटना के बाद लोगों के बीच निजी अस्पताल की सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।
NHM की टीम करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच शुरू कर दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की टीम गठित कर दी गई है। टीम को पूरे घटनाक्रम की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें महिला के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर ऑपरेशन, ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ने, अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति, उपचार की प्रक्रिया और देहरादून रेफर किए जाने तक की पूरी जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल में चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं और मरीज की गंभीर स्थिति के दौरान आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध थीं या नहीं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में किसी स्तर पर चिकित्सकीय या प्रबंधन संबंधी लापरवाही हुई थी या नहीं।
CMO ने कही नियमानुसार कार्रवाई की बात
पौड़ी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिव मोहन शुक्ला के अनुसार, प्रसूता और नवजात की मौत के मामले में जांच के लिए NHM की टीम गठित की गई है। उनके मुताबिक टीम पूरे घटनाक्रम और उपचार प्रक्रिया की जांच करेगी। अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और चिकित्सा प्रोटोकॉल के पालन को भी जांच के दायरे में रखा गया है। वहीं, पुलिस ने मृतका के पति की तहरीर प्राप्त कर ली है और मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
व्यापार सभा ने भी उठाए सवाल
पौड़ी के स्थानीय निवासी और व्यापार सभा के सचिव देवेंद्र सिंह रावत ने भी घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जब शहर में यह निजी अस्पताल शुरू हुआ था तो स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब गंभीर बीमारी और प्रसूति जैसी आवश्यक चिकित्सा सेवाओं के लिए मरीजों को बार-बार देहरादून, ऋषिकेश या अन्य मैदानी शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हाल की घटना के बाद लोगों के बीच अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
शहरवासियों का कहना है कि इस पूरे मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन या किसी चिकित्सा कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।फिलहाल पुलिस स्तर पर तहरीर मिलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूता और नवजात की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या इसमें किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी।




