पंजाब

PSPCL को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, करोड़ों का टेंडर रद्द

पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को पावर क्वालिटी मीटरों की खरीद से जुड़े विवादित टेंडर मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने टेंडर प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन और तकनीकी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूरे टेंडर को रद्द कर दिया है। साथ ही निगम को सभी निर्धारित नियमों का पालन करते हुए नई टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद निगम की खरीद प्रक्रिया और अधिकारियों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।

यह मामला उस समय चर्चा में आया जब तकनीकी आधार पर टेंडर प्रक्रिया से बाहर की गई एक कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आरोप लगाया गया कि जिस तकनीकी कमी के आधार पर उसे अयोग्य घोषित किया गया, वही कमियां बाद में चयनित कंपनी के मीटरों में भी पाई गईं। इसके बावजूद संबंधित कंपनी को टेंडर आवंटित कर दिया गया। इस पूरे मामले ने टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

जानकारी के अनुसार, IEC क्लास-ए पावर क्वालिटी मीटरों की सप्लाई और इंस्टॉलेशन से जुड़े MPQ-246 टेंडर में नियमों से हटकर कई फैसले लिए गए। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने कथित रूप से एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर की शर्तों में ढील दी। यहां तक कि टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद भी संबंधित कंपनी को आवश्यक टाइप टेस्ट रिपोर्ट जमा करने का अतिरिक्त अवसर दिया गया, जिससे वह प्रतियोगिता में बनी रह सकी। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब गठित डेटा असेसमेंट कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में मीटरों से जुड़ी कई गंभीर तकनीकी खामियों की ओर इशारा किया। रिपोर्ट में मीटरों को निर्धारित तकनीकी मानकों पर खरा नहीं बताया गया। इसके बावजूद संबंधित कंपनी को दोबारा टेस्टिंग का अवसर दिया गया और बाद में उसकी प्राइस बिड खोलने की अनुमति भी दे दी गई। इसी फैसले को लेकर पूरी प्रक्रिया विवादों में आ गई।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और तकनीकी शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। अदालत ने माना कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है तो उसे जारी नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पूरे टेंडर को रद्द करते हुए PSPCL को नई प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद PSPCL प्रबंधन अब पूरे मामले की आंतरिक जांच कराने की तैयारी में है। निगम यह पता लगाएगा कि टेंडर प्रक्रिया में आखिर कहां चूक हुई और किन परिस्थितियों में विवादित फैसले लिए गए। माना जा रहा है कि निष्पक्ष जांच होने पर कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं तथा यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Parvat Sankalp News