रुड़की के कप्तान आशीष शर्मा 65 दिनों तक हार्मुज जलडमरूमध्य के पास खतरनाक हालात में फंसे रहने के बाद सुरक्षित घर लौट आए हैं। उन्होंने उन भयावह पलों को याद करते हुए बताया कि हर समय जान का खतरा मंडरा रहा था। कभी जहाज के ऊपर से ड्रोन गुजरते थे तो कभी तेज आवाज के साथ मिसाइलें आसमान चीरती हुई निकल जाती थीं। आसपास होने वाले धमाकों से जहाज तक हिल जाता था और पूरी टीम दहशत में रातें गुजारने को मजबूर थी। कप्तान आशीष शर्मा ने बताया कि उन्होंने 18 जनवरी को जहाज की कमान संभाली थी और तेल लेकर भारत लौटना था। लेकिन जैसे ही जहाज हार्मुज के करीब पहुंचा, हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। उन्होंने बताया कि करीब 50 किलोमीटर दूर एक जहाज पर हमला हुआ था, जिसकी तीव्रता उनके जहाज तक महसूस हुई। पानी में हुए विस्फोट से जहाज कांप उठा और कई रातें बिना सोए गुजारनी पड़ीं।
स्थिति बिगड़ने पर संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने सतर्कता बरतते हुए जहाज को सुरक्षित बंदरगाह पर खड़ा करवाया। वहां सुरक्षा और अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम किए गए, ताकि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित रह सकें। शुरुआत में परिवार से फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क बना रहा, लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों से कॉल बंद कर दी गईं। इसके बाद कप्तान रोज सुबह और शाम “ऑल ओके” का संदेश भेजकर परिवार को अपनी कुशलता की जानकारी देते रहे। कप्तान ने बताया कि उन्होंने अपने 24 सदस्यीय दल का लगातार मनोबल बनाए रखा। वे क्रू मेंबर्स और उनके परिवारों से लगातार संपर्क में रहे, ताकि कोई घबराए नहीं। टीम में भारत, नाइजीरिया और श्रीलंका के सदस्य शामिल थे। हालात सामान्य होने के बाद पहले 12 सदस्यों को वापस भेजा गया। हाल ही में कप्तान समेत चार सदस्य दुबई के रास्ते दिल्ली पहुंचे और फिर अपने घर लौटे।
कप्तान की पत्नी सरूनिका ने बताया कि इस बार होली उनके परिवार के लिए फीकी रही, क्योंकि सभी उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। बेटियां लगातार खबरें देखती रहती थीं और डरी हुई थीं। हालांकि अब कप्तान की सुरक्षित वापसी से परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं। कप्तान आशीष शर्मा की यह कहानी साहस, धैर्य और जिम्मेदारी की मिसाल बन गई है। कठिन हालात में भी उन्होंने खुद को संभालने के साथ-साथ पूरी टीम का हौसला बनाए रखा और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की