उत्तराखण्ड

उत्तराखंड के हक का 2261 करोड़ अब भी यूपी में अटका, पेंशन समेत कई परिसंपत्तियों का भुगतान बाकी

देहरादून:- उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर चर्चा में हैं। राज्य गठन के वर्षों बाद भी कई वित्तीय मामलों का पूरी तरह निपटारा नहीं हो पाया है। अलग-अलग विभागों से जुड़ी देनदारियां, पेंशन की रकम, सिविल डिपॉजिट और निगमों की वित्तीय मांगें अब भी लंबित बताई जा रही हैं। उत्तराखंड सरकार लंबे समय से उत्तर प्रदेश के साथ परिसंपत्तियों और उनसे जुड़ी वित्तीय देनदारियों के मामलों को सुलझाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, कई मामलों में अभी भी दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। यही वजह है कि उत्तराखंड को मिलने वाली बड़ी धनराशि का भुगतान अटका हुआ है।

2261 करोड़ रुपये की देनदारी का मामला

सबसे महत्वपूर्ण मामलों में पेंशन से जुड़ी देनदारी बताई जा रही है। वित्त विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान उत्तर प्रदेश पर करीब 2261 करोड़ रुपये की देनदारी का उल्लेख किया गया है। यह रकम मुख्य रूप से पेंशन मद से संबंधित बताई जा रही है। पेंशन से जुड़े इस मामले में भुगतान नहीं होने के कारण उत्तराखंड के पेंशनर्स से संबंधित वित्तीय दावों का निपटारा भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। राज्य सरकार की ओर से इस विषय को उत्तर प्रदेश के समक्ष लगातार उठाए जाने की बात कही जा रही है।इसके अलावा सिविल डिपॉजिट मद में करीब 440 करोड़ रुपये की देनदारी भी लंबित बताई जा रही है। इन वित्तीय मामलों को लेकर अब उत्तर प्रदेश सरकार के सामने नए सिरे से प्रस्ताव रखने की तैयारी की जा रही है।

वन विकास निगम का 77 करोड़ रुपये का ब्याज

परिसंपत्तियों से जुड़े विवाद का असर केवल पेंशन या वित्त विभाग तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड वन विकास निगम का मामला भी इसी कड़ी में सामने आता है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड वन विकास निगम की ओर से उत्तर प्रदेश वन विकास निगम से करीब 77 करोड़ रुपये के ब्याज की मांग की जा रही है। यह ब्याज करीब 20 वर्षों की अवधि से जुड़ा हुआ बताया गया है। शासन स्तर पर इस रकम के भुगतान को लेकर उत्तर प्रदेश वन विकास निगम को प्रस्ताव भेजने की चर्चा की जा रही है। यदि दोनों राज्यों के बीच इस मामले पर सहमति बनती है तो उत्तराखंड को लंबे समय से लंबित वित्तीय दावे में राहत मिल सकती है।

सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियां भी विवाद में

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे में सिंचाई विभाग से जुड़े मामले भी महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार का कहना है कि इन मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। कई परिसंपत्तियों और उनसे संबंधित दावों को लेकर दोनों राज्यों के बीच अभी भी विवाद की स्थिति बनी हुई है। उत्तराखंड सरकार अपनी ओर से संबंधित दस्तावेज और दावे रखते हुए मामलों के समाधान की कोशिश कर रही है। सरकार की कोशिश है कि लंबे समय से चले आ रहे इन विवादों का जल्द निपटारा हो और जिन वित्तीय संसाधनों पर उत्तराखंड का दावा है, उनकी राशि राज्य को मिल सके।

ऊर्जा और THDC से जुड़े मामलों पर भी मांगी गई रिपोर्ट

परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों में ऊर्जा विभाग भी महत्वपूर्ण है। विभागीय स्तर पर THDC से संबंधित कुछ पुराने मामलों को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। इन मामलों में उत्तर प्रदेश के स्तर पर परियोजनाओं के लिए पहले उपलब्ध कराई गई धनराशि और उसके बाद हुई कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट मांगे जाने की बात सामने आई है। अब पुनर्गठन विभाग को इन मामलों पर रिपोर्ट तैयार करनी है।इस रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग विभागों की परिसंपत्तियों और वित्तीय दावों से संबंधित मुद्दों को एक साथ संकलित कर उत्तर प्रदेश सरकार के सामने रखा जा सकता है।

सुबोध उनियाल ने क्या कहा?

उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के मुताबिक, यूपी के साथ परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। सरकार की कोशिश है कि पुराने विवादों को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए और उत्तराखंड को उसके हिस्से की धनराशि मिल सके। सरकार का मानना है कि विभिन्न विभागों के लंबित मामलों को एक साथ रखते हुए उत्तर प्रदेश के साथ बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे वित्तीय दावों का समाधान निकालने में मदद मिल सके।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

वहीं, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने परिसंपत्तियों के विवाद को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उत्तराखंड में भाजपा की सरकार होने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है, इसके बावजूद राज्य को उसके हक की रकम नहीं मिल पा रही है। हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड के हित में अपेक्षित कदम नहीं उठाए हैं और केंद्र की ओर से भी इस मामले में प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया। उन्होंने राज्य सरकार पर भी परिसंपत्तियों के विवाद को गंभीरता से नहीं सुलझाने का आरोप लगाया।

लंबे समय से चला आ रहा है विवाद

दरअसल, उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड के गठन के बाद परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े कई मुद्दे सामने आए थे। इनमें सरकारी निगमों, सिंचाई परियोजनाओं, ऊर्जा से जुड़े मामलों, कर्मचारियों और पेंशनर्स की देनदारियों समेत कई वित्तीय विषय शामिल हैं। समय-समय पर दोनों राज्यों के बीच इन मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत होती रही है, लेकिन कई मामलों में अंतिम समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। अब राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग विभागों से संबंधित लंबित दावों और देनदारियों का ब्योरा तैयार कर उत्तर प्रदेश के सामने रखने की कवायद की जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि 2261 करोड़ रुपये की पेंशन देनदारी, 440 करोड़ रुपये के सिविल डिपॉजिट और वन विकास निगम के 77 करोड़ रुपये के ब्याज समेत अन्य मामलों पर दोनों राज्यों के बीच किस तरह सहमति बनती है।

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