देहरादून

SIR और चुनाव प्रक्रिया पर काज़ी निजामुद्दीन के सवाल, पंचायत से DAV चुनाव तक उठाए कई मुद्दे

देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और हाल के विभिन्न चुनावों की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए मंगलौर विधायक काज़ी निजामुद्दीन ने ग्राम पंचायत से लेकर नगर निकाय, सहकारिता और छात्रसंघ चुनाव तक कई मामलों का जिक्र किया। निजामुद्दीन ने आरोप लगाया कि अलग-अलग चुनावों में प्रक्रिया को प्रभावित किए जाने और प्रशासनिक भूमिका को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता के अधिकारों को लेकर किसी भी तरह की आशंका गंभीर विषय है। हालांकि, पत्रकार वार्ता में उठाए गए अधिकांश मामले विधायक द्वारा बताए गए उदाहरण और आरोप हैं। संबंधित निर्वाचन अधिकारियों या दूसरे पक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया इन आरोपों के साथ उपलब्ध नहीं है।

चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठाए सवाल

काज़ी निजामुद्दीन ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से जुड़ी व्यवस्था है। उनके मुताबिक मतदान से लेकर मतगणना और परिणाम घोषित होने तक हर चरण में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में अलग-अलग चुनावों के दौरान ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जिनसे चुनाव प्रबंधन और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं। निजामुद्दीन ने SIR के दौरान मतदाता सूचियों में नाम हटने को लेकर भी चिंता जाहिर की। उनका कहना था कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर होता है तो इससे उसके मतदान के अधिकार पर सीधा असर पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन मुद्दों पर सार्वजनिक स्तर पर बहस हो रही है।

नाथूखेड़ी ग्राम प्रधान चुनाव का दिया उदाहरण

कांग्रेस विधायक ने हरिद्वार जिले के नारसन ब्लॉक के नाथूखेड़ी गांव के ग्राम प्रधान चुनाव का उदाहरण देते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाया। निजामुद्दीन के अनुसार, सुशील कुमार नाम के प्रत्याशी को शुरुआती गणना में 22 वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया था। उनका दावा है कि इसके बाद कई बार पुनर्मतगणना कराई गई और आठवीं गणना के बाद परिणाम बदल गया तथा संबंधित प्रत्याशी को एक वोट से पराजित घोषित कर दिया गया। इस दावे को लेकर विधायक ने सवाल उठाया कि इतनी बार मतगणना की आवश्यकता क्यों पड़ी और पूरी प्रक्रिया किन नियमों के तहत हुई। इस मामले की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि या विस्तृत चुनावी रिकॉर्ड पत्रकार वार्ता में प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए फिलहाल यह घटना कांग्रेस विधायक द्वारा रखा गया उदाहरण और आरोप है।

मंगलौर नगर पालिका के मामले का भी जिक्र

निजामुद्दीन ने मंगलौर नगर पालिका से जुड़े चौधरी इस्लाम के मामले को भी पत्रकार वार्ता में उठाया। उनके अनुसार, चौधरी इस्लाम पहले निर्विरोध पार्षद चुने गए और बाद में नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी जीते। विधायक का दावा है कि इसके बाद जब उन्होंने दोबारा पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ने की कोशिश की तो नामांकन के दौरान उनके खिलाफ शिकायत की गई और नजूल भूमि पर कब्जे से जुड़े आरोप के आधार पर नामांकन निरस्त कर दिया गया।कांग्रेस विधायक ने इस कार्रवाई की प्रक्रिया और उन्हें उपलब्ध कराए गए अवसरों को लेकर सवाल उठाए।हालांकि, नामांकन निरस्तीकरण से संबंधित निर्वाचन अधिकारी का विस्तृत पक्ष या मामले के सभी दस्तावेज पत्रकार वार्ता में सार्वजनिक नहीं किए गए। ऐसे में इस मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

सहकारिता चुनाव की परिसीमन प्रक्रिया पर भी सवाल

काज़ी निजामुद्दीन ने सहकारिता चुनावों की परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले परिसीमन अधिसूचित किया गया और बाद में इसमें बदलाव किया गया। उन्होंने इस प्रक्रिया की समय-सीमा को लेकर भी स्पष्टीकरण की मांग की और कहा कि यदि परिसीमन में बदलाव के बाद उसी आधार पर चुनाव कराया गया है तो पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। कांग्रेस विधायक ने संबंधित प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन की जरूरत पर जोर दिया।

DAV छात्रसंघ चुनाव को भी बनाया मुद्दा

पत्रकार वार्ता में DAV पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव का मामला भी उठा। निजामुद्दीन ने कांग्रेस नेता एवं छात्र नेता विनीत भट्ट के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट और उनकी गिरफ्तारी के समय को चुनाव प्रक्रिया से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पहले से कोई मुकदमा था तो चुनाव के दौरान ही गिरफ्तारी क्यों हुई, इस पर स्पष्टीकरण होना चाहिए। निजामुद्दीन ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी आपराधिक मामले में कार्रवाई का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उनका सवाल गिरफ्तारी के समय और परिस्थितियों को लेकर है। DAV छात्रसंघ चुनाव से पहले विनीत भट्ट के खिलाफ NBW के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ताओं द्वारा देहरादून SSP कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। हालिया DAV चुनाव में मतगणना के दौरान हंगामे की खबरें सामने आई थीं। कांग्रेस ने बाद में चुनाव प्रक्रिया और प्रशासन की भूमिका को लेकर अलग से सवाल उठाए।

SIR को लेकर कांग्रेस की चिंता

काज़ी निजामुद्दीन ने SIR प्रक्रिया को लेकर कहा कि कांग्रेस की मुख्य चिंता यह है कि पुनरीक्षण के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से बाहर न हो। उन्होंने कहा कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार राज्य में अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 3 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। इससे पहले दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की गई है। राज्य के आधिकारिक SIR पोर्टल पर ड्राफ्ट रोल, ASD (Absent, Shifted & Deceased) सूची, पोलिंग स्टेशन संबंधी जानकारी और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं।

SIR में बड़ी संख्या में नाम हटाने के अनुरोध

SIR को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस के बीच मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन भी सामने आए हैं। Indian Express की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में दावे-आपत्तियों की अवधि के दौरान 1.3 लाख से अधिक Form-7 आवेदन दाखिल हुए थे। चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियों के निस्तारण की समयसीमा बढ़ाकर 28 सितंबर की थी और अंतिम सूची 3 अक्टूबर को प्रकाशित करने का कार्यक्रम रखा गया। इस पूरी प्रक्रिया में यह महत्वपूर्ण होगा कि जिन नामों पर आपत्ति या हटाने का प्रस्ताव आया, उनमें से कितने नाम अंतिम सूची में बने रहते हैं और कितने नाम प्रक्रिया के बाद हटाए जाते हैं।

चुनाव आयोग की आधिकारिक व्यवस्था में नाम जांचने और आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा

निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर SIR से संबंधित मतदाता सूची और नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग के पोर्टल पर मतदाता नाम खोजने, मतदाता सूची डाउनलोड करने, आवेदन की स्थिति देखने और जरूरत पड़ने पर शिकायत या सुझाव दर्ज कराने जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। उत्तराखंड के CEO पोर्टल पर भी SIR-2026 के तहत ड्राफ्ट रोल और ASD सूची सहित संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं।

3 अक्टूबर की अंतिम सूची पर रहेगी नजर

कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के बीच अब 3 अक्टूबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि ड्राफ्ट सूची के बाद कितने नाम हटे, कितने नाम जोड़े गए और कितने मामलों में दावे-आपत्तियों के बाद सुधार किया गया। काज़ी निजामुद्दीन ने चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि अंतिम सूची में कोई पात्र मतदाता केवल प्रक्रिया संबंधी गलती के कारण अपने मताधिकार से वंचित न रहे। फिलहाल कांग्रेस के आरोप राजनीतिक बयान के स्तर पर हैं। इन आरोपों की वास्तविकता और चुनावी प्रक्रिया में किसी नियम उल्लंघन का निर्धारण संबंधित निर्वाचन रिकॉर्ड, जांच और सक्षम प्राधिकारियों की कार्रवाई के आधार पर ही किया जा सकता है। 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची सामने आने के बाद SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को भी नए आंकड़े मिलेंगे।

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