पांडवाज़ का 20 महीने से भुगतान लंबित होने का दावा, मासूम शर्मा को एडवांस में बुलाने पर उठे सवाल

देहरादून: उत्तराखंड में स्थानीय कलाकारों और बाहरी कलाकारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज होती नजर आ रही है। उत्तराखंड के लोक-संगीत से जुड़े बैंड पांडवाज़ (Pandavaas) ने 38वें राष्ट्रीय खेल, उत्तराखंड 2025 से जुड़े अपने भुगतान के लंबे समय से लंबित होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हस्तक्षेप की मांग की है। पांडवाज़ ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री के नाम सार्वजनिक अपील जारी कर कहा है कि दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में किए गए काम का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। बैंड के मुताबिक, काम पूरा हुए करीब 20 से 21 महीने बीत चुके हैं, लेकिन भुगतान का मामला अभी भी लंबित है। इसी बीच, 1 अक्टूबर को देहरादून के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, रायपुर में आयोजित उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) सीजन-3 के ग्रैंड फिनाले और क्लोजिंग सेरेमनी में हरियाणवी गायक मासूम शर्मा को बुलाए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की ओर से बताया गया कि कलाकार को कार्यक्रम के लिए आधा भुगतान पहले ही किया जा चुका था।
राष्ट्रीय खेल से जुड़े भुगतान को लेकर पांडवाज़ की अपील
पांडवाज़ का कहना है कि 38वें राष्ट्रीय खेलों से जुड़े कार्यों के लिए उसने अपनी जिम्मेदारी पूरी की थी। बैंड के मुताबिक, दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में किए गए काम का भुगतान सितंबर 2026 तक नहीं किया गया। बैंड ने अपनी सार्वजनिक अपील में मुख्यमंत्री से मामले को गंभीरता से देखने और संबंधित विभाग से भुगतान की स्थिति स्पष्ट कराने की मांग की है। पांडवाज़ का दावा है कि भुगतान के लिए उसने अलग-अलग आधिकारिक माध्यमों से संपर्क किया, लेकिन अभी तक ऐसा समाधान नहीं मिला जिससे लंबित भुगतान का निस्तारण हो सके।
CM हेल्पलाइन से लेकर खेल विभाग तक संपर्क का दावा
पांडवाज़ के अनुसार, उसने इस मामले को CM हेल्पलाइन, खेल विभाग, खेल मंत्री, संबंधित अधिकारियों और मुख्यमंत्री आवास स्थित हेल्पडेस्क के सामने रखा। बैंड का दावा है कि CM हेल्पलाइन पर की गई उसकी पहली शिकायत बिना अपेक्षित समाधान के बंद कर दी गई। इसके बाद दोबारा शिकायत किए जाने की बात भी पांडवाज़ ने कही है। हालांकि, शिकायतों की वर्तमान स्थिति और भुगतान प्रक्रिया में देरी के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि बैंड की सार्वजनिक अपील से नहीं होती। इसका आधिकारिक विवरण संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और सरकार के जवाब से ही स्पष्ट होगा।
‘बजट नहीं है, सहयोग करें’—पांडवाज़ का दावा
पांडवाज़ ने अपनी अपील में यह भी दावा किया कि काम के दौरान विभाग की ओर से उसे बजट उपलब्ध नहीं होने की बात बताई गई थी और सहयोग करने का अनुरोध किया गया था। बैंड के मुताबिक, उसने परिस्थितियों को समझते हुए सहयोग किया और अपना काम पूरा किया। अब पांडवाज़ का कहना है कि काम पूरा होने के लंबे समय बाद भी भुगतान को लेकर उसे स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। बैंड ने सवाल उठाया है कि यदि संबंधित आयोजन से जुड़े अन्य भुगतान किए गए हैं तो उसके बिल का निस्तारण क्यों नहीं हुआ। हालांकि, अन्य कलाकारों या वेंडर्स के भुगतान से संबंधित इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
‘विशेष सुविधा नहीं, मेहनत का भुगतान चाहिए’
पांडवाज़ ने मुख्यमंत्री से की गई अपील में कहा है कि उसकी मांग किसी विशेष सुविधा या अतिरिक्त लाभ की नहीं है। बैंड के अनुसार, उसने जो काम किया है, उसके बदले निर्धारित भुगतान मिलना चाहिए। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और संगीत को बढ़ावा देने वाले इस बैंड ने कहा कि वह राज्य में रहकर अपनी कला और संस्कृति के लिए काम कर रहा है। बैंड का कहना है कि जब आधिकारिक माध्यमों से अपेक्षित समाधान नहीं मिला तो उसे सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात सार्वजनिक करनी पड़ी।
दूसरी तरफ मासूम शर्मा के कार्यक्रम को लेकर विवाद
इसी बीच, हरियाणवी गायक मासूम शर्मा को UPL सीजन-3 की क्लोजिंग सेरेमनी में बुलाए जाने को लेकर भी उत्तराखंड में विरोध सामने आया। 30 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, मूल निवास, भू-कानून संघर्ष समिति समेत कुछ संगठनों ने कार्यक्रम का विरोध किया था। बातचीत के बाद क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की ओर से बताया गया कि मासूम शर्मा को कार्यक्रम के लिए आधा भुगतान पहले ही किया जा चुका है। समिति ने कलाकार से मंच से उत्तराखंड की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने तथा भविष्य में आपत्तिजनक भाषा और फूहड़ गीतों से बचने की शर्त रखी थी। स्थानीय कलाकारों को भविष्य के आयोजनों में प्राथमिकता देने पर भी सहमति की बात सामने आई।
अप्रैल में देहरादून में हुआ था विवाद
मासूम शर्मा इससे पहले अप्रैल 2026 में देहरादून के DAV PG College के एक कार्यक्रम में मंच से कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर विवादों में आए थे। इस मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की थी और उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस भी भेजा था। रिपोर्टों के मुताबिक, बाद में मासूम शर्मा ने अपने व्यवहार पर खेद जताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। उन्होंने अपने बयान में कार्यक्रम के दौरान तनाव और एक कथित धमकी का हवाला दिया था। इस पुराने विवाद को लेकर अब कुछ संगठनों ने सवाल उठाया कि ऐसे विवाद के बाद उन्हें उत्तराखंड के एक बड़े खेल आयोजन की क्लोजिंग सेरेमनी में क्यों बुलाया गया।
स्थानीय कलाकारों को मौका देने की मांग
मासूम शर्मा के कार्यक्रम के विरोध में सामने आए संगठनों ने यह भी कहा कि उनका विरोध किसी बाहरी कलाकार की पहचान या राज्य से नहीं, बल्कि कार्यक्रमों में भाषा और प्रस्तुति के स्तर से जुड़ा है। समिति ने देशभर के कलाकारों के उत्तराखंड आने का स्वागत करने की बात कही, लेकिन स्थानीय संस्कृति और सामाजिक मर्यादा का सम्मान करने की अपेक्षा जताई। इसी संदर्भ में पांडवाज़ के लंबित भुगतान का मामला भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आया है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच सीधे तौर पर कोई प्रशासनिक या वित्तीय संबंध है, ऐसा निष्कर्ष उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
अब मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की उम्मीद
पांडवाज़ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले का संज्ञान लेकर संबंधित विभाग से भुगतान की स्थिति स्पष्ट कराने और लंबित राशि के निस्तारण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पांडवाज़ की ओर से किए गए दावों पर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। ऐसे में लंबित भुगतान की वास्तविक स्थिति, बिलों की राशि और भुगतान में देरी का कारण आधिकारिक रिकॉर्ड या विभागीय स्पष्टीकरण के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।



