पंजाब में धमाकों पर सियासत: सीएम मान ने कहा- भाजपा ने करवाए ब्लास्ट, बीजेपी का पलटवार- सबूत दें या फिर इस्तीफा

पंजाब में अमृतसर और जालंधर में मंगलवार रात हुए धमाकों पर अब सियासत भी गरमा गई है। सीएम भगवंत मान ने श्री आनंदपुर साहिब में कहा कि इन धमाकों की जांच चल रही है। यह पंजाब चुनावों के लिए भाजपा की तैयारी है। भाजपा लोगों के बीच हिंसा और डर फैलाकर वोट हासिल करती है। मैं भाजपा से कहना चाहता हूं कि वह ऐसा करना बंद करे। पंजाब के लोग हमेशा शांति चाहते हैं। बीजेपी को जहां भी चुनाव लड़ना होता है, वह वहां जाकर झगड़े करवाती है। मान पंजाब के गृह मंत्री भी हैं।

भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया

वहीं भाजपा ने सीएम के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा की तरफ से सीएम को अपने आरोपों के सबूत देने के लिए कहा गया है। साथ ही भाजपा ने कहा कि अगर बिना सबूत सीएम मान ने ये बात कही है तो इस्तीफा दें। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने भगवंत मान को चुनाैती देते हुए कहा कि यदि उनमें दम है तो वे भाजपा और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर दिखाएं। भाजपा की तरफ से कहा गया कि लगता है कि भगवंत मान की दिमागी हालत ठीक नहीं है। उनको इस्तीफा दे देना चाहिए और अपना सही इलाज करवाना चाहिए। पंजाब एक बॉर्डर वाला राज्य है और वे इसे मैनेज करने में पूरी तरह फेल हो गए हैं। भाजपा पर कीचड़ उछालकर जो गंदी पॉलिटिक्स कर रहे हैं, वह उनकी घटिया सोच का सबूत है। पंजाब के लोग पिछले साढ़े 4 साल से गोलियों, धमाकों, हत्याओं और रोज़ाना होने वाली घटनाओं से परेशान हैं, जो आप की निकम्मी सरकार की देन है। भाजपा के लिए पंजाब की शांति और भाईचारा सबसे जरूरी और सबसे पहले है। भाजपा हमेशा पंजाब के साथ खड़ी रही है और आगे भी खड़ी रहेगी।

जाखड़ बोले-धमाकों से ज्यादा सीएम का बयान चिंताजनक

पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि जालंधर और अमृतसर में हुए बम धमाके गंभीर चिंता का विषय हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का बयान है। जहां एक तरफ पंजाब के डीजीपी इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तान की आईएसआई का हाथ होने की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री, राजनीति से प्रेरित होकर, गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। उनके बयानों से घबराहट और अपनी कुर्सी खोने का डर साफ झलकता है। बेहतर होगा कि वे अपनी कुर्सी की चिंता करना छोड़ दें और इसके बजाय पुलिस को अपना असली काम करने दें, न कि उनका इस्तेमाल विधायकों पर नजर रखने के लिए करें। अगर विधायकों ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर ही लिया है, तो पुलिस की कितनी भी तैनाती उन्हें रोक नहीं पाएगी।

विपक्ष भी मान पर भड़का

कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा ने कहा कि पंजाबियों को भगवंत मान के राजनीतिक जोक्स या लाखों की शोहरत नहीं चाहिए, बल्कि एक सुरक्षित माहौल चाहिए। अगर आप राज्य को संभाल नहीं सकते, तो गृह मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दें; पंजाब को बारूद का एक और ढेर न बनाएं!

बाजवा बोले-महज संयोग नहीं मान सकते

वहीं विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि एक ही दिन में एक के बाद एक हुए धमाकों को महज एक संयोग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पंजाब सरकार को इन घटनाओं के पीछे के लोगों की पहचान करने और उन्हें सजा दिलाने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे समय में जब कई तरह की साजिशों की बातें चल रही हैं और आम जनता में डर फैल रहा है, प्रशासन चुप या लापरवाह नहीं रह सकता। पंजाब पहले से ही युवाओं में बेरोजगारी और अवसरों की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। शांति और स्थिरता को बिगाड़ने की कोई भी कोशिश हमारे लोगों के बीच अनिश्चितता की भावना को और गहरा ही करेगी। पंजाब अब अस्थिरता के एक और दौर का सामना नहीं कर सकता। कानून-व्यवस्था बनाए रखना और जनता का भरोसा फिर से जीतना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

खुफिया तंत्र की विफलता-मजीठिया  

वहीं अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि दोनों धमाके बीएसएफ ठिकानों, सेना और अर्धसैनिक बलों की छावनियों के बाहर हुए। पंजाब भारत-पाक सीमा से सटा एक संवेदनशील राज्य है। यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं है, बल्कि सुरक्षा और खुफिया तंत्र के तालमेल की एक भयानक विफलता है। यह पूरी तरह से खुफिया तंत्र की विफलता है। ऐसा लगता है कि सुरक्षा से जुड़े सभी पक्ष गहरी नींद में सोए हुए हैं, जबकि सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा को दांव पर लगाया जा रहा है। जब खासा, बीएसएफ जोन और रेलवे ट्रैक जैसे संवेदनशील इलाके भी अब सुरक्षित नहीं रहे, तो आम पंजाबियों की सुरक्षा के लिए आखिर बचा ही क्या है? भगवंत मान और कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव के राज में, पंजाब की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सरकार सुरक्षा व्यवस्था संभालने के बजाय सिर्फ सुर्खियां बटोरने में व्यस्त है। राष्ट्र-विरोधी तत्व खुलेआम दहशत फैला रहे हैं, बयान जारी कर रहे हैं और व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं; जबकि राज्य सरकार बेबस, दिशाहीन नजर आ रही है। पंजाब सब देख रहा है। पंजाब पूछ रहा है-क्या पीआरा वीडियो, झूठे नैरेटिव और डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) के अलावा, इस सरकार में शासन-प्रशासन नाम की कोई चीज बची भी है?

केंद्र-पंजाब सरकार दोनों जिम्मेदार-वड़िंग

वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि क्या पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि यह एक धमाका था? पंजाब पुलिस और पंजाब के मुख्यमंत्री कभी भी आसानी से यह दावा कर सकते हैं कि यह धमाका नहीं, बल्कि टायर फटने की घटना थी… इन धमाकों की ज़िम्मेदारी मुख्यमंत्री भगवंत मान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर है। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार अपने नाटक-तमाशों में व्यस्त हैं। केंद्र सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पंजाब में कानून-व्यवस्था और भी ज़्यादा बिगड़ जाए।

मान का बयान अपरिपक्व राजनीति

वहीं सांसद सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का केंद्र और भाजपा को दोषी ठहराने वाला बयान, उनकी अपरिपक्व और अनुभवहीन राजनीति को दर्शाता है। यह स्वीकार करके कि पंजाब में ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं, मुख्यमंत्री ने खुद ही राज्य में कानून-व्यवस्था के पूरी तरह से चरमरा जाने की पोल खोल दी है। सुरक्षा में हुई चूकों को ठीक करने के बजाय, आप सरकार केंद्र पर राजनीतिक कीचड़ उछालने में व्यस्त है, और इस तरह वह पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू होने का रास्ता खुद ही तैयार कर रही है।

फारूक अब्दुल्ला का विवादित बयान 

वहीं पंजाब में दोहरे विस्फोट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने विवादित बयान दिया। अब्दुल्ला ने कहा कि हिंदुस्तान में धमाके होते रहते हैं, कौन सी नई बात है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *