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उत्तराखंड बारिश अलर्ट: देहरादून में डीएम डॉ. आशीष चौहान ग्राउंड जीरो पर, सहस्रधारा-सरोना मार्ग बंद; संवेदनशील क्षेत्रों का किया निरीक्षण

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट के बीच देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है। संभावित आपदा की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान स्वयं मैदान में उतरे और जिले के संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर राहत एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में जन-जीवन की सुरक्षा से समझौता न किया जाए और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सबसे पहले सहस्रधारा–सरोना मोटर मार्ग पहुंचे, जहां लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर मलबा आने से सड़क पूरी तरह बाधित हो गई थी। अधिकारियों से जानकारी लेने पर पता चला कि यह मार्ग पूर्व में भी आपदा से प्रभावित रहा है और स्थायी सुरक्षा कार्य पूरे न होने के कारण बारिश के दौरान बार-बार अवरुद्ध हो जाता है। इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल दोनों ओर से जेसीबी मशीनें लगाकर मलबा हटाने और सड़क को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग के स्थायी उपचार और सुरक्षा कार्यों के लिए शासन स्तर पर आवश्यक पहल की जाएगी, ताकि भविष्य में लोगों को बार-बार इस समस्या का सामना न करना पड़े।

इसके बाद जिलाधिकारी कार्लीगढ़ क्षेत्र पहुंचे, जहां सिंचाई विभाग द्वारा नदी क्षेत्र में किए गए सुधार कार्यों और चैनलाइजेशन का निरीक्षण किया गया। उन्होंने विशेष रूप से नदी के दूसरी ओर रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तहसील प्रशासन को निर्देश दिए कि प्रत्येक परिवार के पास पर्याप्त राशन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें। साथ ही इन परिवारों की पूरी जानकारी और संपर्क विवरण जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष में दर्ज किए जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

जिलाधिकारी ने आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील मानी जाने वाली सपेरा बस्ती का भी दौरा किया। उन्होंने स्थानीय निवासियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान नाले के उपचार, क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवारों की मरम्मत और अन्य सुरक्षात्मक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। नगर निगम को स्पष्ट रूप से कहा गया कि जिन मकानों को असुरक्षित चिन्हित किया गया है, वहां रहने वाले परिवारों को बिना देरी सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए और बारिश के दौरान चेतावनी प्रणाली को पूरी तरह प्रभावी बनाया जाए।

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार जिले में 9 जुलाई को औसतन 25.75 मिमी वर्षा दर्ज की गई। यमुना नदी का जलस्तर खतरे के स्तर के आसपास पहुंच गया है, जबकि गंगा और टोंस नदी का जलस्तर फिलहाल सुरक्षित सीमा के भीतर है। लगातार वर्षा के कारण हरिपुर–इच्छाड़ी–कुवानू–मीनास राज्य मार्ग सहित कई अन्य सड़कें भूस्खलन और मलबे के कारण प्रभावित हुई हैं। प्रशासन द्वारा इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने का कार्य जारी है। इसके अलावा जिले के कई ग्रामीण संपर्क मार्ग भी बाधित हुए हैं, जिन्हें बहाल करने के लिए संबंधित विभाग लगातार कार्य कर रहे हैं।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव दल पूरी तरह अलर्ट मोड में रहें, संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करें और मौसम विभाग द्वारा जारी प्रत्येक चेतावनी पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के निकट न जाएं तथा केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इसके लिए सभी विभाग 24 घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य कर रहे हैं।

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