पंजाब

लुधियाना में भ्रष्टाचार पर विजिलेंस का बड़ा एक्शन, 4 साल में 396 FIR दर्ज

पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के सत्ता में आने के बाद लुधियाना जिला विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई के लिहाज से लगातार चर्चा में रहा है। पिछले करीब साढ़े चार वर्षों में रिश्वतखोरी, सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में विजिलेंस ने कई कार्रवाई की हैं। इन मामलों में छोटे कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों तक पर शिकंजा कसा गया है। विजिलेंस के आंकड़ों के मुताबिक, 2018 से 2021 के बीच लुधियाना जिले में भ्रष्टाचार से जुड़े 103 एफआईआर दर्ज की गई थीं। वहीं, 2022 से 2025 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 396 एफआईआर तक पहुंच गया। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार के मामलों में विजिलेंस की कार्रवाई काफी तेज हुई है। वर्ष 2024 में लुधियाना विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के 31 मामले दर्ज किए। इन मामलों में कुल 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 17 गिरफ्तारियां आरोपियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने के मामलों में हुईं। वहीं, 10 मामले मुख्यमंत्री की एंटी करप्शन हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए।

रायकोट से आम आदमी पार्टी के विधायक हाकम सिंह ठेकेदार ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के परिणाम सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दी है और आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार अपने कामकाज और उपलब्धियों का पूरा रिकॉर्ड जनता के सामने रखेगी। लुधियाना जिले में विजिलेंस की चर्चित कार्रवाई में 12 जून 2025 का रायकोट मामला भी शामिल है। इस मामले में रायकोट एसडीएम कार्यालय के स्टेनो जतिंदर सिंह उर्फ नीटा नूरपुरा को गिरफ्तार किया गया था। विजिलेंस के अनुसार, उनके पास से 24 लाख 6 हजार रुपये की कथित रिश्वत की नकदी बरामद हुई थी। जांच आगे बढ़ने के बाद तत्कालीन एसडीएम गुरबीर सिंह कोहली और यूथ अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुखजीत सिंह बग्गी झोरडां को भी मामले में नामजद किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एसडीएम गुरबीर सिंह कोहली को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक मिली, जबकि नीटा नूरपुरा और सुखजीत सिंह बग्गी झोरडां जमानत पर बाहर हैं।

अगस्त 2024 में महिला सेल की तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त निर्दोष कौर और उनके रीडर बेअंत सिंह को भी विजिलेंस ने गिरफ्तार किया था। दोनों पर 30 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज कर दी थी। इससे पहले जनवरी 2023 में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अशोक कुमार को 25 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। आरोप था कि विकास कार्य से जुड़ी अनुदान राशि जारी करने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था। तत्कालीन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी नरिंदर सिंह धालीवाल के खिलाफ भी निजी ट्रांसपोर्टरों से कथित तौर पर मासिक रिश्वत लेने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों की भूमिका और निजी ट्रांसपोर्टरों से कथित वसूली को लेकर जांच की गई। लुधियाना में लगातार हो रही विजिलेंस कार्रवाई को सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के प्रमुख उदाहरणों में गिना जा रहा है। हालांकि, इन मामलों में आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब इन मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

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