पंजाब

पंजाब में कानून-व्यवस्था पर घमासान: 46 दिन में तीन आप नेताओं की हत्या, विपक्ष ने सरकार को घेरा

पंजाब में 46 दिन के भीतर आम आदमी पार्टी के तीन नेताओं की गोली मारकर हत्या ने सूबे की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों को लगातार निशाना बनाया जाना पुलिस तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हमलावरों में कानून का खौफ क्यों नहीं दिख रहा, यह भी जांच का अहम विषय है।

करीब डेढ़ महीने के दौरान दो सरपंचों और एक अन्य आप नेता पर सरेआम गोलियां बरसाई गईं। इन वारदातों ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आखिर सत्ताधारी दल के प्रतिनिधियों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, इन घटनाओं ने विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का मौका दे दिया है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पंजाब में अराजकता का माहौल है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बिक्रम सिंह मजीठिया ने डीजीपी के इस्तीफे की मांग की।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह वड़िंग ने कहा कि जब सत्ताधारी दल के नेता ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विधायक परगट सिंह ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि प्रदेश में खून-खराबा कब थमेगा। लगातार हो रही वारदातों ने सरकार के लिए कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना बड़ी परीक्षा बना दिया है।

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