उत्तराखंड में लोकायुक्त नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट

उत्तराखंड में लंबे समय से लंबित लोकायुक्त नियुक्ति को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जून के पहले सप्ताह में चयन समिति की बैठक आयोजित कर 16 जून तक प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है।

लंबे समय से खाली पड़ा है लोकायुक्त का पद

यह मामला हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया कि उत्तराखंड में लंबे समय से लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है, जबकि हर साल लोकायुक्त कार्यालय पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की स्वतंत्र जांच के लिए राज्य में फिलहाल कोई प्रभावी और स्वायत्त व्यवस्था मौजूद नहीं है।

मुख्य सचिव ने अदालत में दाखिल किया शपथपत्र

सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्धन की ओर से अदालत में शपथपत्र दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि लोकायुक्त चयन के लिए सर्च कमेटी गठन की प्रक्रिया जारी है। हालांकि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने में अभी कुछ और समय लग सकता है। सरकार की ओर से अदालत से अतिरिक्त समय देने की मांग भी की गई।

3 अप्रैल की बैठक नहीं हो पाई थी

सरकार ने अदालत को बताया कि 3 अप्रैल 2026 को चयन समिति की बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन कुछ कारणों से बैठक आयोजित नहीं हो सकी। इसके बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 29 अप्रैल 2026 को चयन समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष, न्यायमूर्ति और सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल हुए। हालांकि नेता प्रतिपक्ष इस बैठक में मौजूद नहीं रहे।

सर्च कमेटी गठन पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान लोकायुक्त चयन के लिए सर्च कमेटी गठित करने पर चर्चा की गई। इसके अलावा सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के साथ वित्त, बैंकिंग, बीमा, विधि और प्रबंधन क्षेत्र के विशेषज्ञों के नामों पर भी विचार किया गया। सरकार ने कहा कि आगामी बैठक में इन नामों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

कर्मचारियों के वेतन और बिल भुगतान का मुद्दा भी उठा

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्तमान में लोकायुक्त कार्यालय में नौ कर्मचारी कार्यरत हैं। अदालत के पूर्व आदेशों के चलते कर्मचारियों के वेतन और बिजली-पानी जैसे आवश्यक बिलों का भुगतान लंबित है। सरकार ने इन खर्चों के भुगतान की अनुमति भी कोर्ट से मांगी है।

जून में होगी अगली अहम बैठक

महाधिवक्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जून के पहले सप्ताह में चयन समिति की अगली बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में लोकायुक्त चयन के लिए सर्च कमेटी के नामों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अदालत ने सरकार को 16 जून तक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

भ्रष्टाचार विरोधी व्यवस्था पर टिकी निगाहें

लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर चल रही देरी पर अब आम जनता और सामाजिक संगठनों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यदि जल्द नियुक्ति होती है तो राज्य में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए एक मजबूत तंत्र तैयार हो सकेगा।

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