होमकुंड में नंदा देवी बड़ी जात की मुख्य पूजा संपन्न, तीन चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई; 23 सितंबर को कुरूड़ में समापन

चमोली: हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच पंचगंगा क्षेत्र में स्थित पवित्र होमकुंड में नंदा देवी बड़ी जात यात्रा का महत्वपूर्ण धार्मिक चरण विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों के साथ पूरा हो गया। पूजा के बाद यात्रा के साथ चल रहे तीन चौसिंगा खाड़ुओं को पारंपरिक विधि-विधान के बीच कैलाश की ओर विदा किया गया। इसी के साथ बड़ी जात का मुख्य धार्मिक पड़ाव संपन्न हुआ और देव डोलियां एवं छंतोलियां अब सिद्धपीठ कुरूड़ की वापसी यात्रा पर हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 23 सितंबर को कुरूड़ पहुंचने के बाद यज्ञ-अनुष्ठान और धार्मिक विधि-विधान के साथ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा-2026 का औपचारिक समापन किया जाएगा।
होमकुंड पहुंचते ही गूंजे मां नंदा के जयकारे
शीला समुद्र में स्नान और पूजा-अर्चना के बाद दशोली, बंड और ज्वाल्पा क्षेत्र की नंदा देवी की डोलियां-छंतोलियां तथा पिछले 17 दिनों से यात्रा में शामिल तीन चौसिंगा खाड़ू होमकुंड के लिए रवाना हुए। त्रिशूली और नंदा घुंघटी की पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में स्थित होमकुंड पहुंचते ही पूरा क्षेत्र मां नंदा के जयकारों से गूंज उठा। यहां नंदा-भगवती की विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। पुजारियों और पंडितों ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कराई। इस अवसर पर बड़ी जात आयोजन समिति और कुरूड़ मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
भावुक रहा चौसिंगा खाड़ुओं का कैलाश प्रस्थान
होमकुंड में पूजा के बाद यात्रा का सबसे भावुक धार्मिक पड़ाव आया। तीनों चौसिंगा खाड़ुओं को पारंपरिक रूप से सजाया गया। उनकी पीठ पर नंदा देवी को अर्पित किए जाने वाले पवाड़े के रूप में खाजा, कलैऊ, प्रसादी, फल-फूल, आभूषण और श्रृंगार सामग्री रखी गई।मंत्रोच्चार और मां नंदा के जयकारों के बीच तीनों चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया। इस दौरान कई श्रद्धालु भावुक नजर आए। खाड़ुओं की कैलाश विदाई के साथ ही होमकुंड में बड़ी जात की मुख्य पूजा पूरी हुई और यात्रा ने वापसी का रास्ता पकड़ लिया।
जामुन डाली से सुतोल तक पहुंची यात्रा
होमकुंड से वापसी के दौरान यात्रा 17वें और चौथे निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंची, जहां रात्रि प्रवास और देवी जागरण हुआ। इसके बाद देव डोलियां-छंतोलियां जामुन डाली से सुतोल गांव के लिए रवाना हुईं। घने जंगलों के रास्ते यात्रा तातड़ पहुंची। यहां ध्योंसिंह देवता की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने विश्राम किया। इसके बाद यात्रा सुतोल पहुंची, जहां ग्रामीणों ने देव डोलियों और यात्रियों का स्वागत किया।करीब 280 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। होमकुंड में मुख्य पूजा और चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई के बाद कई यात्री अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं।
अब कुरूड़ की ओर बढ़ रही देव डोलियां
बड़ी जात यात्रा अब आबादी वाले क्षेत्रों से होते हुए सिद्धपीठ कुरूड़ की ओर आगे बढ़ रही है। निर्धारित पड़ावों से गुजरने के बाद 23 सितंबर को दशोली और बंड की देव डोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचेंगी। यहां यज्ञ-अनुष्ठान और धार्मिक परंपराओं के साथ यात्रा का विधिवत समापन होगा।
देवराड़ा-थराली की उत्सव डोली भी वापसी पर
वहीं देवराड़ा-थराली क्षेत्र की उत्सव डोली भी अपनी वापसी यात्रा पर है। ल्वाणी से कांडे और बमणबेरा होते हुए डोली उलंग्रा पहुंची, जहां ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना और देवी जागरण के साथ स्वागत किया। इसके बाद डोली हाट कल्याणी, इच्छोली और अठ्ठू गांव से होते हुए बेराधार पहुंची। रास्ते में ग्रामीणों ने जगह-जगह डोली का स्वागत किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली सिरमथल, टुंड्री और गोठिंड़ा होते हुए आगे बढ़ेगी और अंत में सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेगी। इस तरह होमकुंड में बड़ी पूजा और चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई के साथ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक चरण पूरा हो चुका है। अब देव डोलियां पारंपरिक पड़ावों से वापस लौट रही हैं और 23 सितंबर को कुरूड़ में यज्ञ-अनुष्ठान के साथ यात्रा के औपचारिक समापन की तैयारी है।




