उत्तराखंड की डॉक्यूमेंट्री ‘This Tree Won’t Fall’ का लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में चयन, दुनिया देखेगी चिपको आंदोलन की कहानी

चमोली: उत्तराखंड की पर्यावरणीय विरासत, महिला सशक्तिकरण और ऐतिहासिक चिपको आंदोलन पर आधारित चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘This Tree Won’t Fall’ (दिस ट्री वोंट फॉल) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस डॉक्यूमेंट्री का चयन प्रतिष्ठित London Indian Film Festival (LIFF) 2026 के लिए किया गया है। यह उपलब्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है। यह फिल्म उत्तराखंड की 83 वर्षीय पर्यावरण संरक्षक सुदेशा देवी के जीवन, संघर्ष और जंगलों को बचाने के उनके अद्वितीय योगदान पर आधारित है। फिल्म के माध्यम से दुनिया भर के दर्शकों को चिपको आंदोलन की उस ऐतिहासिक विरासत से रूबरू कराया जाएगा, जिसने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वैश्विक सोच को नई पहचान दी। चार वर्षों की रिसर्च और मेहनत से बनी डॉक्यूमेंट्री
करीब चार वर्षों तक लगातार शोध, दस्तावेज़ीकरण और फिल्मांकन के बाद तैयार हुई यह डॉक्यूमेंट्री हिमालयी गांवों की उन महिलाओं की प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत करती है, जिन्होंने लगभग पांच दशक पहले जंगलों को बचाने के लिए पेड़ों से चिपककर इतिहास रच दिया था। फिल्म दिखाती है कि कठिन पहाड़ी जीवन, सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद महिलाओं ने जिस साहस, दूरदृष्टि और नेतृत्व का परिचय दिया, वह आज भी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पूरी दुनिया के लिए मिसाल बना हुआ है। सुदेशा देवी के संघर्ष को मिलेगी वैश्विक पहचान
डॉक्यूमेंट्री की मुख्य पात्र 83 वर्षीय पर्यावरण संरक्षक सुदेशा देवी हैं, जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए समर्पित किया। उन्होंने चिपको आंदोलन के दौरान पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्हें गले लगाकर विरोध किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति संरक्षण का मजबूत संदेश दिया। फिल्म यह बताती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल जंगलों या पेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, संस्कृति, जल स्रोतों, जैव विविधता और मानव जीवन के भविष्य से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
फिल्म के लेखक ने बताया उद्देश्य
फिल्म के लेखक दीपक रमोला ने कहा कि चिपको आंदोलन दुनिया के सबसे प्रभावशाली पर्यावरण आंदोलनों में से एक माना जाता है। इसकी सफलता के पीछे पहाड़ की उन महिलाओं का संघर्ष और साहस था, जिनका जीवन जंगलों पर निर्भर था।
उन्होंने बताया कि ‘This Tree Won’t Fall’ केवल एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं को श्रद्धांजलि है जिन्होंने जंगलों की रक्षा के लिए अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समर्पित कर दिया। यह डॉक्यूमेंट्री महिला नेतृत्व, सामुदायिक भागीदारी और प्रकृति संरक्षण के संदेश को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास है। इन लोगों ने निभाई अहम भूमिका
डॉक्यूमेंट्री की कहानी दीपक रमोला और अपूर्वा बख्शी ने लिखी है। इसका निर्माण अपूर्वा बख्शी, दीपक रमोला और मनीषा त्यागराजन ने किया है।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी ध्रुव वर्मा और सिद्धार्थ गोविंदन ने की है, जबकि संपादन की जिम्मेदारी अजीत नायर और ध्रुव वर्मा ने संभाली। फिल्म का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार ताजदार जुनैद ने तैयार किया है। 19 जुलाई तक चलेगा लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल
लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल का आयोजन लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर में 19 जुलाई तक किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘This Tree Won’t Fall’ का प्रदर्शन उत्तराखंड, चिपको आंदोलन और सुदेशा देवी के संघर्ष को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, महिला नेतृत्व, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का जीवंत दस्तावेज़ है। इससे दुनिया को यह संदेश मिलेगा कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है। साथ ही यह फिल्म नई पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



