उत्तराखंड के बुग्यालों में पर्यटन को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने हटाए 3 बड़े प्रतिबंध, अब ओवरनाइट स्टे और ट्रेकिंग को मिली मंजूरी

चमोली: उत्तराखंड के प्रसिद्ध उच्च हिमालयी बुग्यालों (Alpine Meadows) में पर्यटन और ट्रेकिंग गतिविधियों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। लगभग आठ वर्षों से लागू कई महत्वपूर्ण प्रतिबंधों में अब राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के वर्ष 2018 के तीन प्रमुख निर्देशों को निरस्त करते हुए ट्रेकिंग और पर्यटन गतिविधियों को नई राहत दी है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि बुग्यालों के पर्यावरण और पारिस्थितिकी संरक्षण से जुड़े अन्य सभी नियम पहले की तरह सख्ती से लागू रहेंगे।
2018 में क्यों लगे थे प्रतिबंध?
दरअसल, वर्ष 2014 में औली-बेदनी-बुग्याल संरक्षण समिति की ओर से उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के बाद 21 अगस्त 2018 को हाईकोर्ट ने बुग्यालों के संरक्षण के उद्देश्य से कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन आदेशों के बाद उत्तराखंड के अधिकांश हाई हिमालयी बुग्यालों में ट्रेकिंग, कैंपिंग और पर्यटन गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने किन प्रतिबंधों को हटाया?
उत्तराखंड सरकार द्वारा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के बाद 20 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने हाईकोर्ट के तीन प्रमुख निर्देशों को अव्यावहारिक मानते हुए निरस्त कर दिया।
अब—
- बुग्यालों में प्रतिदिन केवल 200 पर्यटकों की सीमा समाप्त हो गई है।
- रात्रि प्रवास (Overnight Stay) पर लगा पूर्ण प्रतिबंध हटा दिया गया है।
- बुग्यालों को राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने पर विचार संबंधी निर्देश भी प्रभावहीन हो गया है।
पर्यावरण संरक्षण के नियम रहेंगे लागू
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट द्वारा जारी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अन्य सभी दिशा-निर्देश पहले की तरह प्रभावी रहेंगे। अदालत ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ बुग्यालों की नाजुक पारिस्थितिकी, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
वन विभाग ने जारी किए नए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदरीनाथ वन प्रभाग, गोपेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी ने सभी वन क्षेत्राधिकारियों को आदेश जारी कर सर्वोच्च न्यायालय के संशोधित निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी प्रभावी नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उत्तराखंड के ट्रेकिंग रूट, एडवेंचर टूरिज्म, स्थानीय गाइड, पोर्टर, होमस्टे संचालक और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों को राहत मिलेगी। लंबे समय से स्थानीय लोग इन प्रतिबंधों में व्यवहारिक बदलाव की मांग कर रहे थे। अब पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। वन विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि पर्यटकों को बुग्यालों में प्लास्टिक प्रदूषण, कूड़ा फैलाने, प्राकृतिक वनस्पति को नुकसान पहुंचाने और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं होगी। सभी गतिविधियां निर्धारित नियमों और संरक्षण मानकों के तहत ही संचालित की जाएंगी।




