श्री अकाल तख्त साहिब में आज पेश होंगे पंजाब सरकार के मंत्री, स्पीकर और विधायक

जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच चल रहे विवाद के बीच सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब में महत्वपूर्ण घटनाक्रम होने जा रहा है। श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से तलब किए गए पंजाब सरकार के जनप्रतिनिधि आज अमृतसर पहुंचकर अपना पक्ष रखेंगे। इस पेशी को धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें आम आदमी पार्टी के मंत्री, विधानसभा स्पीकर, विधायक तथा अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

पंजाब सरकार की ओर से नौ सिख मंत्री श्री अकाल तख्त साहिब में उपस्थित होंगे। इनमें वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, लोक निर्माण मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, राजस्व मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर, ग्रामीण विकास मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध और एनआरआई मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह शामिल हैं। इनके साथ पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां भी श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होकर सरकार का पक्ष रखेंगे।

आम आदमी पार्टी के 30 सिख विधायक भी इस पेशी में शामिल होंगे। इनके अलावा कांग्रेस के सात विधायक, शिरोमणि अकाली दल के दो विधायक और सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय विधायक राणा इंदरप्रताप सिंह भी श्री अकाल तख्त साहिब में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि सभी जनप्रतिनिधि धार्मिक मर्यादा का पालन करते हुए अपनी बात रखेंगे और श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों का सम्मान करेंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रविवार को स्पष्ट किया कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख कौम की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और वहां से जो भी आदेश या निर्णय आएगा, उसे पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा स्पीकर, मंत्री और विधायक किसी राजनीतिक प्रतिनिधि के रूप में नहीं बल्कि एक विनम्र सिख के रूप में श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थित होंगे। उन्होंने बताया कि अमृतसर में हुई बैठक के दौरान सभी ने सामूहिक रूप से पेश होने का फैसला लिया है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर इस पूरे मुद्दे को धार्मिक रंग देकर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखा जाना चाहिए तथा सरकार किसी भी धार्मिक संस्था का पूरा सम्मान करती है। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य किसी भी प्रकार से धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं है और जो भी निर्णय श्री अकाल तख्त साहिब देगा, उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

फर्जी वीडियो विवाद को लेकर भी मुख्यमंत्री ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए एक व्यक्ति ने मास्क पहनकर उनकी नकल करते हुए फर्जी वीडियो तैयार किया, जिसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी और सभी साक्ष्य जल्द ही श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को पत्र के माध्यम से सौंपे जाएंगे। सरकार इस पत्र को अंतिम रूप दे रही है और पेशी के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि सिख पंथ में संगत सर्वोच्च होती है और हर सिख के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश सर्वोपरि हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी तलब किए जाने पर उन्होंने राष्ट्रपति के कार्यक्रम को छोड़कर श्री अकाल तख्त साहिब में हाजिरी दी थी। इस बार भी सरकार पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ अपना पक्ष रखेगी।

उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पहले श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष बेअदबी और अन्य मामलों में अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की थी, लेकिन उनके खिलाफ गुरुद्वारों के बाहर सामाजिक बहिष्कार के पोस्टर नहीं लगाए गए। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि अलग-अलग मामलों में अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के पास अब सरकार के विकास कार्यों के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए वे धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और विकास जैसे मुद्दों पर लगातार काम कर रही है तथा जनता सब कुछ समझती है। उन्होंने दोहराया कि सिख पंथ में संगत सर्वोच्च है और श्री अकाल तख्त साहिब के अंतिम निर्णय का सम्मान किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *