पंजाब में राजस्थान-जम्मू कश्मीर नेशनल हाईवे-54 के लिए जमीन अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। गुरदासपुर में तैनात पीसीएस अधिकारी और तत्कालीन एसडीएम अनुप्रीत कौर रंधावा को पुलिस ने शनिवार सुबह उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई तरनतारन की पट्टी पुलिस ने लंबे समय से चल रही जांच के बाद की है। मामले में करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपये के सरकारी मुआवजे को कथित तौर पर अपात्र लोगों के खातों में ट्रांसफर करने का आरोप है। जांच एजेंसियों के मुताबिक वर्ष 2018-19 के दौरान नेशनल हाईवे-54 परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान पांच ऐसे लोगों को मुआवजे की रकम जारी कर दी गई, जिनकी जमीन अधिग्रहण सूची में शामिल ही नहीं थी। आरोप है कि भुगतान से पहले राजस्व विभाग के रिकॉर्ड का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया गया।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब पट्टी के तत्कालीन एसडीएम नवराज सिंह बराड़ ने तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर प्रदीप सभ्रवाल को शिकायत भेजी। शिकायत में कहा गया कि जिन लोगों को मुआवजा दिया गया, उनका संबंधित भूमि से कोई संबंध नहीं था। जांच के बाद 5 सितंबर 2019 को थाना सिटी पट्टी में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था। पुलिस जांच में सामने आया कि मानांवाला निवासी जसबीर कौर, फताहपुर अलगो महमूदपुरा निवासी राजविंदर कौर, कोट दसौंधी मल्ल निवासी सरताज सिंह, अमृतसर निवासी बिक्रमजीत सिंह और गुरजीत कौर के खातों में रकम भेजी गई। जबकि राजस्व रिकॉर्ड और केंद्र सरकार की अधिसूचना में इन लोगों की जमीन का कोई उल्लेख नहीं मिला।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित भुगतान तत्कालीन एसडीएम अनुप्रीत कौर रंधावा के हस्ताक्षर के बाद जारी किए गए थे। इसके बाद इस मामले को सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन का गंभीर मामला माना गया। बाद में डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी, जिसके आधार पर तत्कालीन मुख्य सचिव करण अवतार सिंह ने अनुप्रीत कौर रंधावा को निलंबित करने के आदेश जारी किए थे। अब पुलिस ने अनुप्रीत कौर रंधावा को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे, रकम किस प्रक्रिया के तहत जारी हुई और क्या इसमें किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है।