उत्तराखंड में निवेश का नया रिकॉर्ड: ₹1.06 लाख करोड़ के MOU ग्राउंडिंग से बदलेगी राज्य की तस्वीर।

उत्तराखंड को निवेश का हब बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कोशिशों को बड़ी सफलता मिली है। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के तहत हुए एमओयू में से 1,06,953 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम शुरू (Grounding) हो चुका है। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के औद्योगिक इतिहास की ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है।

एमओयू ग्राउंडिंग: आंकड़ों की जुबानी

बैठक में बताया गया कि समिट के दौरान कुल 1,779 एमओयू हुए थे, जिनकी कुल वैल्यू 3,57,693 करोड़ रुपये थी। लगभग 30% निवेश का धरातल पर उतरना राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और निवेशकों के भरोसे का प्रतीक है।

CM धामी के 5 बड़े मास्टरस्ट्रोक और निर्देश

  1. नोडल अधिकारियों की तैनाती: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि हर विभाग में एक नोडल अधिकारी होगा, जिसका एकमात्र काम एमओयू के क्रियान्वयन की निगरानी करना होगा।

  2. नीतियों का सरलीकरण: यदि किसी पुराने नियम या नीति की वजह से निवेश रुक रहा है, तो उसमें तत्काल संशोधन या शिथिलीकरण का प्रस्ताव लाने के आदेश दिए गए।

  3. स्पिरिचुअल और कल्चरल जोन: उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत को भुनाने के लिए स्पिरिचुअल जोन का विकास और हिंदू स्टडीज सेंटर की स्थापना को प्राथमिकता में रखा गया है।

  4. आयुर्वेद AIIMS और शिक्षा: राज्य में आयुर्वेद एम्स की स्थापना और पारिस्थितिकी (Ecology) व अर्थव्यवस्था (Economy) के संतुलन पर आधारित यूनिवर्सिटी बनाने हेतु होमवर्क शुरू करने के निर्देश दिए।

  5. भराड़ीसैंण और मंदिर निर्माण: ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में मंदिर अवसंरचना और अन्य निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही गई।

  6. हर जिले में ‘उद्योग मित्र समिति’

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक वातावरण को और मजबूत करने के लिए उद्योग विभाग को निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद में हर महीने “उद्योग मित्र समिति” की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उद्योगों की समस्याओं का तुरंत समाधान करना है।

पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी पर फोकस

पिथौरागढ़ और कैंची धाम जैसे उभरते पर्यटन केंद्रों पर विश्वस्तरीय होटलों के निर्माण के लिए ‘स्पेशल टूरिस्ट जोन’ आधारित पॉलिसी तैयार की जा रही है। इसका मकसद पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देना और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ना है।

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