उत्तराखण्ड

Nainital Mall Road No Horn Zone: अब मॉल रोड पर नहीं बजेगा गाड़ियों का हॉर्न, उल्लंघन पर कटेगा चालान

नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल की प्रसिद्ध मॉल रोड पर अब वाहनों के अनावश्यक हॉर्न का शोर सुनाई नहीं देगा। जिला प्रशासन ने मॉल रोड को ‘नो हॉर्न जोन’ घोषित कर दिया है। यानी इस क्षेत्र में वाहनों का हॉर्न बजाना प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह कदम नैनीताल को ध्वनि प्रदूषण से मुक्त और शांत पर्यटन स्थल बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। नियम का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने मॉल रोड पर अभियान चलाकर वाहन चालकों को नए नियम की जानकारी दी।

मॉल रोड पर अब हॉर्न बजाने पर रोक

नैनीताल की मॉल रोड शहर के सबसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में शामिल है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं। प्रशासन के मुताबिक, वाहनों द्वारा अनावश्यक रूप से बजाए जाने वाले हॉर्न से लगातार ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा था। इससे पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को भी परेशानी हो रही थी। इसी समस्या को देखते हुए अब मॉल रोड को नो हॉर्न जोन बनाया गया है। वाहन चालकों को स्पष्ट रूप से बताया गया है कि इस क्षेत्र में अनावश्यक हॉर्न बजाने की अनुमति नहीं होगी।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन का कदम

जिला प्रशासन के अनुसार मॉल रोड को नो हॉर्न जोन घोषित करने की कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देशों और जिला प्रशासन के आदेश के बाद की गई है। प्रशासन का उद्देश्य नैनीताल की शांत और प्राकृतिक पहचान को बनाए रखना है। अधिकारियों का कहना है कि पर्यटन नगरी में आने वाले लोगों को बेहतर और शांत वातावरण उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

पुलिस ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

एसपी सिटी जगदीश चंद्र ने कहा कि नो हॉर्न जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी। यानी वाहन चालकों को अब मॉल रोड पर हॉर्न के इस्तेमाल को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी।

अभियान चलाकर वाहन चालकों को किया जागरूक

नो हॉर्न जोन की व्यवस्था लागू होने के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने मॉल रोड पर विशेष अभियान चलाया। अभियान के दौरान वाहन चालकों को रोककर उन्हें नियमों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने समझाया कि मॉल रोड पर अनावश्यक हॉर्न बजाना प्रतिबंधित है। साथ ही वाहन चालकों को यह भी बताया गया कि भविष्य में नियम तोड़ने पर केवल चेतावनी नहीं दी जाएगी, बल्कि नियमानुसार जुर्माना और अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।

प्रशासन बोला- शांत वातावरण बनाए रखना जरूरी

एसडीएम नवाजिश खालिक के मुताबिक नैनीताल देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं। लोग यहां प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण का आनंद लेने आते हैं। ऐसे में वाहनों के अनावश्यक हॉर्न से होने वाला ध्वनि प्रदूषण शहर की पहचान और पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित करता है। प्रशासन का कहना है कि नो हॉर्न जोन बनाने का मकसद शहर के शांत वातावरण को बनाए रखना है।

स्थानीय लोगों ने फैसले पर उठाए सवाल

हालांकि प्रशासन के इस फैसले को लेकर कुछ स्थानीय लोग पूरी तरह सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मॉल रोड पर पैदल चलने वालों और वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसी स्थिति में यदि वाहन चालक हॉर्न नहीं बजा पाएंगे तो सड़क पर मौजूद लोगों को वाहन के बारे में कैसे पता चलेगा। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि हॉर्न पर पूरी तरह रोक लगाने से सड़क हादसों का खतरा बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि कई बार सड़क पर पैदल चलने वाले लोग अचानक वाहन के सामने आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में चालक के पास हॉर्न बजाकर उन्हें सावधान करने का विकल्प भी नहीं रहेगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नियम लागू करने से पहले सड़क सुरक्षा के पहलू पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।

आरटीओ ने भी वाहन चालकों से की अपील

आरटीओ गुरुदेव सिंह ने वाहन चालकों से नियमों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी वाहन चालक प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और नैनीताल को शांत एवं स्वच्छ पर्यटन नगरी बनाए रखने में सहयोग दें। प्रशासन की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि नो हॉर्न जोन की व्यवस्था केवल अभियान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नियमों की निगरानी लगातार की जाएगी।

अब नजर नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर

नैनीताल की मॉल रोड को नो हॉर्न जोन बनाने का फैसला जहां ध्वनि प्रदूषण कम करने और पर्यटकों को शांत वातावरण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं स्थानीय लोगों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने इस फैसले को लेकर बहस भी शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा, दोनों के बीच किस तरह संतुलन बनाता है।

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