उत्तराखण्ड

38 साल पहले सियाचिन में शहीद हुए लांसनायक चन्द्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर आज पहुंचेगा हल्द्वानी, सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

सियाचिन ग्लेशियर में हिमस्खलन में दबकर शहीद हुए लांसनायक चन्द्रशेखर हर्बोला का बीते दिन पार्थिक शरीर मिला, 16,000 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर एक आखिरी प्रयास में एक और सैनिक के अस्थि शेष को 13 अगस्त को पाया गया, लांस नायक चन्द्र शेखर के अस्थि शेष ग्लेशियर पर बने एक पुराने बंकर में मिला, वहीं 38 साल पहले सियाचिन में शहीद हुए उत्तराखंड निवासी लांसनायक चन्द्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर आज हल्द्वानी पहुंचेगा। एसडीएम मनीष कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासन सेना और उनके परिवार के लगातार संपर्क में है। बताया कि उनके परिवार के हल्द्वानी स्थित आवास में जाकर परिजनों से बात की गई है और ढांढस बंधाया गया।  शहीद के परिजनों ने बताया कि उन्हें सेना की ओर से जानकारी दी गई है कि आज तिकोनिया स्थित आर्मी कैंट एरिया में पार्थिव शरीर पहुंचेगा। इसके बाद पार्थिव शरीर घर लाया जाएगा। फिर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

ग्लेशियर की चपेट में आकर हुए थे शहीद

भारत की ओर से मई 1984 में सियाचिन में पेट्रोलिंग के लिए 20 सैनिकों की टुकड़ी भेजी गई थी। इसमें लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला भी शामिल थे। सभी सैनिक सियाचिन में ग्लेशियर टूटने की वजह से इसकी चपेट में आ गए जिसके बाद किसी भी सैनिक के बचने की उम्मीद नहीं रही। भारत सरकार और सेना की ओर से सैनिकों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसमें 15 सैनिकों के पार्थिव शरीर मिल गए थे लेकिन पांच सैनिकों का पता नहीं चल सका था।

ऑपरेशन मेघदूत

अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट के हाथीगुर बिंता निवासी चंद्रशेखर हर्बोला 19 कुमाऊं रेजीमेंट में लांसनायक थे। वह 1975 में सेना में भर्ती हुए थे। 1984 में भारत और पाकिस्तान के बीच सियाचिन के लिए झड़प हो गई थी। भारत ने इस मिशन का नाम ऑपरेशन मेघदूत रखा था।

 

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