कर्णप्रयाग में सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच हुई मारपीट और विवाद के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों दर्ज मुकदमों की विवेचना चमोली से हटाकर हरिद्वार पुलिस को सौंप दी है। यह फैसला घटना के बाद उठे सवालों, विभिन्न संगठनों की आपत्तियों और निष्पक्ष जांच की मांग को देखते हुए लिया गया है। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि किसी दूसरे जिले में जांच स्थानांतरित करने से मामले की निष्पक्षता बनी रहेगी और सभी पक्षों को न्याय मिलने की संभावना मजबूत होगी। इस फैसले के बाद अब पूरे मामले की निगरानी हरिद्वार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में की जाएगी।
गौरतलब है कि 16 जून को कर्णप्रयाग में सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। विवाद के दौरान मारपीट की घटना सामने आई थी, जिसके बाद पुलिस ने पहले सिख श्रद्धालुओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि घटना के बाद सिख समुदाय और विभिन्न संगठनों ने आरोप लगाया कि मामले में केवल एक पक्ष की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई। इसके बाद घायल सिख श्रद्धालु के पिता ने भी शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर 20 जून को कर्णप्रयाग थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई। दोनों पक्षों की शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों मुकदमों की जांच हरिद्वार स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।
अब इन दोनों मामलों की विवेचना हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के पर्यवेक्षण में की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सभी तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को निष्पक्ष रूप से परखा जाएगा। इसके साथ ही घटना से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जाएगी ताकि वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय पुलिस के व्यवहार को लेकर लगाए गए आरोप हैं। विभिन्न सिख संगठनों ने चमोली पुलिस की कार्यशैली, गिरफ्तारियों की प्रक्रिया और श्रद्धालुओं के साथ कथित व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन आरोपों की जांच भी अब अलग से कराई जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने इस जिम्मेदारी डीआईजी यशवंत सिंह को सौंपी है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि दो सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपें। रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका, कार्रवाई की प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों की सत्यता का परीक्षण किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम पर अब प्रदेशभर की नजरें टिकी हुई हैं। सिख समुदाय, स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि हरिद्वार पुलिस की विवेचना और डीआईजी स्तर की जांच के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने आ पाएगी। पुलिस मुख्यालय ने भरोसा दिलाया है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायसंगत कार्रवाई की जाएगी, ताकि किसी भी पक्ष को अन्याय का सामना न करना पड़े।