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जी-7 सम्मेलन में मोदी-ट्रंप मुलाकात पर दुनिया की नजरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली प्रस्तावित बैठक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्सुकता बनी हुई है। फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई पिछली मुलाकात के लगभग 16 महीने बाद दोनों नेता एक बार फिर आमने-सामने होंगे। इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ वैश्विक राजनीति, व्यापार और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। फरवरी 2025 में हुई पिछली बैठक को भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने वाला कदम माना गया था। उस दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कॉम्पैक्ट पहल की शुरुआत की थी। इसके अलावा ऊर्जा, परमाणु सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनी थीं।

हालांकि शुरुआती सकारात्मक माहौल के बावजूद बीते महीनों में दोनों देशों के रिश्तों के सामने कई चुनौतियां भी आई हैं। व्यापारिक टैरिफ, आयात शुल्क, वीजा से जुड़े मुद्दे, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां और विभिन्न रणनीतिक मामलों पर मतभेदों ने संबंधों को प्रभावित किया है। अमेरिका द्वारा व्यापारिक नीतियों के तहत विभिन्न देशों पर लगाए गए शुल्कों और भारत के साथ व्यापार संतुलन को लेकर उठाए गए मुद्दों ने भी दोनों देशों के बीच चर्चा और विवाद को जन्म दिया। भारत की चिंताओं में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता भी शामिल रही है। वहीं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन, क्वाड समूह की भूमिका और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी नई परिस्थितियां सामने आई हैं। इसके बावजूद दोनों देशों ने संवाद और सहयोग की प्रक्रिया जारी रखी है और उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखे हैं।

जी-7 सम्मेलन के दौरान होने वाली बैठक में व्यापार समझौते को लेकर स्पष्टता, निवेश बढ़ाने, रक्षा सहयोग को मजबूत करने और नई तकनीकों में साझेदारी जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठ सकते हैं। इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा होने की संभावना है। भारत की ओर से ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की जा सकती है। वहीं रणनीतिक सहयोग, रक्षा खरीद, महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में साझेदारी और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर भी वार्ता होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक न केवल भारत-अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण होगी, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक और आर्थिक परिदृश्य पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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