अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के भारत दौरे के बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सरकार अमेरिका के साथ ऐसे समझौते की दिशा में बढ़ रही है, जिससे देश के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है। कांग्रेस का कहना है कि भारत को किसी भी ऐसे व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए जो किसानों, छोटे उद्योगों और घरेलू बाजार के लिए नुकसानदायक साबित हो।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की कोशिश बंद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापारिक निर्णय लेने चाहिए। रमेश ने मलेशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार ने परिस्थितियां बदलने के बाद अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द कर दिया था और भारत को भी अपने हितों की रक्षा के लिए इसी तरह का दृढ़ रुख अपनाना चाहिए।
कांग्रेस के अनुसार 6 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक साझा बयान जारी किया गया था। पार्टी का दावा है कि उस समय संसद में विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच यह पहल सामने आई थी। समझौते के प्रारूप के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का संकेत दिया था। इसके बदले भारत द्वारा अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क में बड़ी राहत देने तथा अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई गई थी।
हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप की टैक्स नीति को अवैध ठहराए जाने के बाद पूरा परिदृश्य बदल गया। पार्टी का कहना है कि इससे भारत को मिलने वाली संभावित व्यापारिक राहत समाप्त हो गई और अमेरिका ने भारत सहित कई व्यापारिक साझेदार देशों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क लागू कर दिया। कांग्रेस का दावा है कि इस स्थिति ने समझौते की विश्वसनीयता और लाभ दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका वर्तमान में भारत सहित लगभग 60 देशों की व्यापारिक नीतियों की समीक्षा कर रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने और पुराने समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि ऐसे माहौल में किसी भी बड़े व्यापार समझौते पर जल्दबाजी में निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस ने यह भी आशंका जताई है कि प्रस्तावित व्यापार व्यवस्था का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। पार्टी के अनुसार जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसान अमेरिकी कृषि उत्पादों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि भारत अपनी ओर से बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जता रहा है, जबकि अमेरिका की ओर से दीर्घकालिक और ठोस गारंटी नहीं दी जा रही है।
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि जब अमेरिका जापान और यूरोपीय संघ जैसे अपने प्रमुख सहयोगियों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी दे सकता है, तो भारत के साथ किसी समझौते के बाद ऐसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होगी, इसकी क्या गारंटी है। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में अपने किसानों, उद्योगों और रोजगार के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कांग्रेस ने अंत में कहा कि केंद्र सरकार को राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने चाहिए और किसी भी विदेशी दबाव में नहीं आना चाहिए। पार्टी का कहना है कि जेमिसन ग्रीर का भारत दौरा भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी समझौते से देश की अर्थव्यवस्था, किसानों और घरेलू उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।