विकासनगर: हरिपुर में मां यमुना की प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद तेज, लोक पंचायत समिति ने दी 15 दिन की मोहलत

देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र के हरिपुर में प्रस्तावित 21 फीट ऊंची मां यमुना की प्रतिमा की स्थापना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर जहां लोक पंचायत यमुना तीर्थ समिति ब्रिटिशकालीन पुल के पिलरों पर प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने इसका विरोध करते हुए पुल को ‘श्याम सेतु’ के रूप में विकसित किए जाने की मांग उठाई है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
2023 में हुआ था यमुना घाट और कृष्ण धाम का शिलान्यास
हरिपुर स्थित यमुना घाट के सौंदर्यीकरण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यमुना घाट एवं यमुना कृष्ण धाम परियोजना का शिलान्यास किया था। वर्तमान में घाट का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की स्थिति में है। इसी परियोजना के तहत लोक पंचायत यमुना तीर्थ समिति ने अहमदाबाद में तैयार कराई गई 21 फीट ऊंची मां यमुना की प्रतिमा को पुराने ब्रिटिशकालीन पुल के पिलरों पर स्थापित करने का निर्णय लिया था।
रामशरण नौटियाल ने जताया विरोध
बीते 25 जुलाई को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने धरना देकर प्रतिमा को पुल के पिलरों पर स्थापित किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक पुल को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के साथ ‘श्याम सेतु’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए और मां यमुना की प्रतिमा किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाए।
लोक पंचायत समिति ने दी 15 दिन की समय-सीमा
प्रतिमा स्थापना का विरोध सामने आने के बाद लोक पंचायत यमुना तीर्थ समिति ने रामशरण नौटियाल को 15 दिनों की समय-सीमा देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि के भीतर वे शासन स्तर से ‘श्याम सेतु’ के लिए सैद्धांतिक या आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त कर लेते हैं, तो समिति उस निर्णय पर विचार करेगी। हालांकि समिति का कहना है कि यदि निर्धारित समय में कोई आधिकारिक स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की जाती है, तो वह मां यमुना की प्रतिमा को किसी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने के लिए स्वतंत्र होगी।
2016 से चल रहा है समिति का अभियान
लोक पंचायत यमुना तीर्थ समिति का कहना है कि वह वर्ष 2016 से हरिपुर क्षेत्र में यमुना घाटों के विकास, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और मां यमुना की प्रतिमा स्थापना के उद्देश्य से लगातार कार्य कर रही है। इसी प्रयास के परिणामस्वरूप वर्ष 2023 में यमुना घाट परियोजना का शिलान्यास हुआ था।
प्रतिमा खुले में रखी, समिति ने जताई चिंता
समिति के सचिव सतपाल चौहान ने कहा कि विरोध के चलते मां यमुना की प्रतिमा को अभी तक स्थापित नहीं किया जा सका है और उसे अस्थायी रूप से खुले स्थान पर सुरक्षित ढककर रखा गया है। उनका कहना है कि यदि प्रतिमा को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी विरोध करने वाले पक्ष की होगी।
‘श्याम सेतु’ के समर्थन में अब तक नहीं मिला शासनादेश: समिति
लोक पंचायत के सदस्य श्रीचंद शर्मा ने कहा कि रामशरण नौटियाल वर्ष 2022-23 से इस पुल को ‘श्याम सेतु’ के रूप में विकसित करने की बात कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस संबंध में शासन स्तर से कोई आधिकारिक आदेश या स्वीकृति जारी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि समिति ने संबंधित विभागों से जानकारी भी प्राप्त की, लेकिन अब तक ‘श्याम सेतु’ परियोजना के संबंध में कोई शासनादेश उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में यदि निर्धारित समय के भीतर आधिकारिक स्वीकृति नहीं मिलती है तो समिति अपनी आगे की कार्यवाही करेगी।




