देहरादून: दशहरे पर रावण दहन के बीच उत्तराखंड की सियासत में भी बयानबाजी तेज हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रावण के पुतले की बढ़ती ऊंचाई की तुलना समाज में बढ़ते भ्रष्टाचार से की, तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पर चुटकी लेते हुए पलटवार किया। गोदियाल ने कहा कि दशहरे के दिन कई तरह के रावण और ‘गुण्डेश्वर’ आगे आकर रावण के पुतले का दहन करेंगे और फिर ठहाके लगाएंगे।
त्रिवेंद्र रावत ने भ्रष्टाचार को लेकर कसा था तंज
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दशहरे पर देहरादून में तैयार किए गए रावण के विशाल पुतले का जिक्र करते हुए भ्रष्टाचार पर कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा कि इस बार पुतले के निर्माण में करीब छह टन लोहा इस्तेमाल हुआ है और उसकी ऊंचाई 180 फीट से अधिक हो गई है। उन्होंने रावण के पुतले के हर साल बढ़ते आकार को भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी से जोड़ते हुए सवाल उठाया था।
गणेश गोदियाल का पलटवार, कई तरह के रावणों का जिक्र
त्रिवेंद्र रावत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के लिए कई तरह के रावण आगे आएंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र के कई ‘गुण्डेश्वर’ भी पुतले को तीर मारकर दहन करेंगे और फिर ऐसा महसूस करेंगे, जैसे उन्होंने रावण का अंत कर दिया हो। गोदियाल की इस टिप्पणी को त्रिवेंद्र रावत के भ्रष्टाचार संबंधी बयान पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। दोनों नेताओं की बयानबाजी ने दशहरे के अवसर पर उत्तराखंड की राजनीति में एक नया सियासी रंग जोड़ दिया।
दशहरे पर भ्रष्टाचार को लेकर सियासी तीर
रावण के पुतले की ऊंचाई को लेकर शुरू हुई यह बहस अब भ्रष्टाचार और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दों तक पहुंच गई है। जहां त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुतले के बढ़ते आकार के जरिए भ्रष्टाचार पर निशाना साधा, वहीं गणेश गोदियाल ने अपने अंदाज में जवाब देते हुए राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र के लोगों पर कटाक्ष किया। दशहरे पर रावण दहन के साथ नेताओं के इन बयानों ने भी खूब चर्चा बटोरी। अब यह बयानबाजी राजनीतिक गलियारों में किस तरह आगे बढ़ती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।