उत्तराखंड में संविदा नियुक्ति पर विवाद, बेरोजगार संघ ने दी निदेशालय में तालाबंदी की चेतावनी – Parvat Sankalp News

उत्तराखंड में संविदा नियुक्ति पर विवाद, बेरोजगार संघ ने दी निदेशालय में तालाबंदी की चेतावनी

उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग में संविदा नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने रवि पांडे की संविदा नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर शहरी विकास निदेशालय में तालाबंदी कर आंदोलन किया जाएगा।

RTI दस्तावेजों के आधार पर चयन प्रक्रिया पर सवाल

बेरोजगार संघ का आरोप है कि रवि पांडे की संविदा नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता और शर्तें इस तरह तैयार की गईं कि उन्हें ही लाभ मिल सके। संगठन के मुताबिक, पद के लिए केवल एक आवेदन प्राप्त हुआ और उसी आधार पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। संघ का सवाल है कि एक ही आवेदन आने की स्थिति में दोबारा आवेदन क्यों नहीं मांगे गए और चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए। संगठन का कहना है कि नियुक्ति को लेकर पहले भी लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया और शर्तों पर सवाल उठाए गए हैं।

रिटायरमेंट से पहले संविदा पद पर सहमति का मामला

संघ की ओर से प्रस्तुत विवरण के अनुसार, 29 मार्च 2026 को पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था और आवेदन की अंतिम तिथि 15 अप्रैल निर्धारित थी। इसके बाद 17 अप्रैल को नियुक्ति की सिफारिश किए जाने और 24 अप्रैल को रवि पांडे की ओर से पद स्वीकार करने की सहमति दिए जाने का दावा किया गया है। रवि पांडे 30 अप्रैल 2026 को अधीक्षण अभियंता के नियमित सरकारी पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस समय-सीमा को लेकर संगठन ने सवाल उठाए हैं। संघ के अनुसार, संविदा पद के लिए प्रस्तावित मानदेय 2.50 लाख रुपये प्रतिमाह और हर वर्ष 25 हजार रुपये की वेतनवृद्धि निर्धारित किए जाने की बात भी सामने आई है। संगठन ने पूछा है कि इन शर्तों को किस नियम और प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई।

कचरा प्रबंधन परियोजनाओं और बजट को लेकर भी सवाल

बेरोजगार संघ ने रवि पांडे के पूर्व कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि उनके विभाग में अधीक्षण अभियंता रहने के दौरान राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन की 21 परियोजनाएं बंद हो गई थीं और 22 करोड़ रुपये का बजट केंद्र सरकार को वापस लौटाना पड़ा था। संघ ने मांग की है कि इन परियोजनाओं की स्थिति, बजट वापस होने के कारणों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की भी जांच की जाए। इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना आवश्यक है।

मंत्री और अधिकारियों से सात सवाल

उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा, सचिव आईएएस नितेश झा, संयुक्त सचिव महावीर सिंह चौहान और निदेशक विनोद गोस्वामी से जुड़े मामले में कई सवाल उठाए हैं। इनमें चयन की शर्तें तय करने का आधार, एकमात्र आवेदन पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय, मानदेय और वार्षिक वेतनवृद्धि की मंजूरी, पूर्व कार्यकाल की समीक्षा तथा शिकायतों पर कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं। संगठन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शहरी विकास मंत्री से नियुक्ति संबंधी विज्ञापन, आवेदन, चयन प्रक्रिया, सहमति पत्र और मानदेय से जुड़ी शर्तें सार्वजनिक करने की मांग की है।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

बेरोजगार संघ ने चेतावनी दी है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और संगठन की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो शहरी विकास निदेशालय में तालाबंदी कर आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, यह मामला संघ की ओर से लगाए गए आरोपों और नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों से जुड़ा है। नियुक्ति की वैधता, चयन के नियमों के पालन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष के लिए विभाग का पक्ष तथा आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

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