नवरात्र में बागेश्वर के मां भगवती मंदिर में लगी आग, पहाड़ की प्राचीन नक्काशीदार धरोहर को नुकसान – Parvat Sankalp News

नवरात्र में बागेश्वर के मां भगवती मंदिर में लगी आग, पहाड़ की प्राचीन नक्काशीदार धरोहर को नुकसान

बागेश्वर। शारदीय नवरात्र के बीच उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। कपकोट ब्लॉक के दुर्गम क्षेत्र बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर में आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना में मंदिर के मुख्य हिस्से को नुकसान पहुंचने की सूचना है। आग लगने की खबर से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में चिंता और मायूसी का माहौल है। बदियाकोट का मां भगवती मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ ही उत्तराखंड की पारंपरिक स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। मंदिर में लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी और इसकी पारंपरिक निर्माण शैली इसे विशिष्ट पहचान देती थी।

नवरात्र के दौरान घटना से श्रद्धालु दुखी

शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में आग लगने की घटना ने श्रद्धालुओं को व्यथित कर दिया है। मां भगवती के प्रति लोगों की गहरी आस्था से जुड़े इस मंदिर को नुकसान पहुंचने की सूचना से क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल ही नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है।

पहाड़ी स्थापत्य और नक्काशी की अनमोल पहचान

बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर की पारंपरिक वास्तुकला पहाड़ की प्राचीन निर्माण परंपरा और स्थानीय कारीगरों के हुनर को दर्शाती रही है। लकड़ी पर की गई आकर्षक नक्काशी मंदिर की सुंदरता और विशिष्टता का अहम हिस्सा थी। ऐसे में आग से मंदिर को पहुंचे नुकसान की खबर ने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

आग लगने के कारणों का पता नहीं

फिलहाल आग लगने के कारणों की जानकारी सामने नहीं आई है। मंदिर को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति का भी आधिकारिक आकलन सामने आना बाकी है। घटना से संबंधित विस्तृत जानकारी और नुकसान के आकलन के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां भगवती से सभी की कुशलता और क्षेत्र की रक्षा की प्रार्थना कर रहे हैं। बदियाकोट के इस मंदिर में हुई घटना ने एक बार फिर पहाड़ के पारंपरिक धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के महत्व को सामने ला दिया है।

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