देहरादून। उत्तराखंड में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने और उनकी नौकरी पाने की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने प्रशिक्षण व्यवस्था को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को ऐसे कौशल सिखाए जाएं, जिनकी वास्तविक मांग कंपनियों, फैक्ट्रियों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मौजूद है। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे और उद्योगों को भी अपनी जरूरत के अनुसार कुशल कर्मचारी उपलब्ध हो पाएंगे। इसी उद्देश्य से शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में कौशल विकास एवं रोजगार से संबंधित महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने के साथ युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करने, प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर बनाने और रोजगार की संभावनाओं का आकलन करने पर चर्चा हुई। बैठक में कौशल विकास एवं सेवायोजन सचिव सी. रविशंकर, श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव मनुज गोयल, रोहित मीणा, नवनीत पाण्डे, अनुराधा पाल, नरेंद्र सिंह भंडारी, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) उत्तराखंड के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सीआईआई के निदेशक गौरव लांबा और बजाज इंजीनियरिंग स्किल्स ट्रेनिंग सेंटर के डॉ. सचिन शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जिलों में रोजगार की संभावनाओं के आधार पर तैयार होंगी योजनाएं
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों के लिए जिला कौशल विकास योजना (District Skill Development Plan—DSDP) जल्द तैयार कर संबंधित पोर्टल पर अपलोड की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले की आर्थिक गतिविधियों, रोजगार के उपलब्ध अवसरों, प्रशिक्षण संस्थानों की सुविधाओं और स्थानीय स्तर पर जरूरी कौशल का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए। जिला स्तर पर तैयार होने वाली इन योजनाओं के माध्यम से यह पहचान की जाएगी कि किन क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं अधिक हैं और उन क्षेत्रों में काम करने के लिए युवाओं को किस प्रकार के प्रशिक्षण की जरूरत है। यदि किसी जिले में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं, लेकिन वहां आवश्यक कौशल सिखाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो जरूरत के अनुसार नए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा। इस पहल से कौशल विकास की योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाने और युवाओं को अपने ही जिले या आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
उद्योगों की जरूरत और युवाओं की ट्रेनिंग के बीच का अंतर होगा दूर
बैठक में मुख्य सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उद्योगों की जरूरत और प्रशिक्षण संस्थानों में उपलब्ध पाठ्यक्रमों के बीच मौजूद अंतर को दूर करना आवश्यक है। कई बार कंपनियों को विशिष्ट तकनीकी कौशल वाले कर्मचारियों की जरूरत होती है, लेकिन प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के पास उन कार्यों के लिए जरूरी व्यावहारिक ज्ञान और दक्षता नहीं होती। इस समस्या के समाधान के लिए विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाओं, आवश्यक कर्मचारियों की संख्या और प्रशिक्षण के लक्ष्यों का आकलन करके योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके साथ ही नई तकनीकों और उभरते हुए कौशल वाले क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उत्तराखंड के युवा बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप अपनी क्षमताएं विकसित कर सकें। इस कार्य में सेतु आयोग की अध्ययन रिपोर्ट का उपयोग करने पर भी जोर दिया गया। उद्देश्य यह है कि कौशल विकास से जुड़ी योजनाएं केवल सामान्य प्रशिक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक रोजगार जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं।
ट्रेनिंग की गुणवत्ता सुधारने के लिए उद्योग संगठनों का सहयोग
कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए मुख्य सचिव ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) जैसे औद्योगिक संगठनों और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होने से युवाओं को आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक कार्यप्रणाली और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की जानकारी देने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने प्रदेश में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानक विकसित करने पर भी जोर दिया। इससे प्रशिक्षण व्यवस्था में एकरूपता लाने और विभिन्न संस्थानों में दी जाने वाली ट्रेनिंग के स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
थर्ड पार्टी ऑडिट से होगी प्रशिक्षण की समीक्षा
मुख्य सचिव ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए नियमित मूल्यांकन और थर्ड पार्टी ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए। इसके जरिए यह जांचने पर जोर रहेगा कि प्रशिक्षण निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित हो रहा है या नहीं और युवाओं को वास्तव में जरूरी कौशल हासिल हो रहे हैं या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कौशल विकास योजनाओं की सफलता केवल प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी करने से नहीं मापी जानी चाहिए। इन योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य युवाओं को इतना सक्षम बनाना है कि वे उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार काम कर सकें और उन्हें रोजगार प्राप्त करने में मदद मिले।
रोजगार से जोड़ने पर रहेगा कौशल विकास का फोकस
उत्तराखंड में कौशल विकास की व्यवस्था को उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार करने की यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिला स्तर पर रोजगार की संभावनाओं की पहचान, जरूरत के अनुसार नए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, उद्योग संगठनों का सहयोग और प्रशिक्षण की नियमित समीक्षा जैसे कदम इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं। सरकार का जोर युवाओं को केवल प्रशिक्षण देने के बजाय उन्हें व्यावहारिक रूप से रोजगार के योग्य बनाने पर है। यदि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे युवाओं की कौशल क्षमता में सुधार, उद्योगों को कुशल कार्यबल की उपलब्धता और प्रदेश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।