अल्मोड़ा में शिक्षा व्यवस्था पर फूटा गुस्सा: छात्राओं ने सड़क पर उतरकर किया प्रदर्शन, ‘अटैचमेंट’ खेल से भविष्य दांव पर।

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दी। अल्मोड़ा जिले के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज (GGIC) में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की कमी को लेकर छात्राओं और अभिभावकों का धैर्य जवाब दे गया। गुरुवार को अभिभावक संघ के नेतृत्व में दर्जनों छात्राओं ने सोमेश्वर चौराहे पर चक्का जाम करते हुए शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

‘अटैचमेंट’ की राजनीति ने बिगाड़ा खेल

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक (अंग्रेजी) को नवंबर माह में नियमों को ताक पर रखकर गुजराड़ा (देहरादून) अटैच कर दिया गया। इसके बाद से ही स्कूल में अंग्रेजी विषय की पढ़ाई पूरी तरह बंद है। विद्यालय में पढ़ रही 188 छात्राओं का भविष्य अब अंधकार में नजर आ रहा है, क्योंकि बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं और बिना शिक्षक के सिलेबस पूरा होना नामुमकिन है।

स्वाध्याय के भरोसे बोर्ड परीक्षार्थी

अभिभावकों ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय के लिए छात्राएं अब केवल ‘सेल्फ स्टडी’ के भरोसे हैं। अभिभावक संघ की अध्यक्ष रेखा बोरा ने कड़े शब्दों में कहा कि एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर दुर्गम क्षेत्रों के शिक्षकों को सुगम में अटैच कर बेटियों की शिक्षा को बाधित किया जा रहा है।

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