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हरियाणा के बहुचर्चित 661 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) मामले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर चार्जशीट को अंतिम रूप देने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में प्रदेश के 6 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी चल रही है, जबकि जांच के दौरान 2 अधिकारियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई है। CBI की जांच में जिन 6 IAS अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है, उनमें विनीत गर्ग, पंकज अग्रवाल, मोहम्मद शाइन, डॉ. साकेत कुमार, आर. के. सिंह और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी प्रदीप दहिया शामिल हैं। एजेंसी ने मामले की जांच के दौरान इन अधिकारियों की भूमिका से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को खंगाला है। इनमें से पंकज अग्रवाल, आर. के. सिंह और प्रदीप दहिया को CBI पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
वहीं, विनीत गर्ग, मोहम्मद शाइन और डॉ. साकेत कुमार के ठिकानों पर भी CBI की ओर से सर्च ऑपरेशन चलाया जा चुका है। जांच एजेंसी ने इन तलाशी अभियानों के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य संभावित साक्ष्य जुटाए थे। अब इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। दूसरी ओर, जांच में डी. के. बेहरा और मनीराम शर्मा को फिलहाल राहत मिलने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों अधिकारियों के खिलाफ अदालत में आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। मनीराम शर्मा का नाम एक व्हाट्सएप चैट में सामने आया था, लेकिन जांच के दौरान उस चैट में किए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। वहीं, डी. के. बेहरा ने सरकारी फाइलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अपने से वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारी की ओर संकेत किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) की धारा 19 भी महत्वपूर्ण है। इसके तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ संबंधित अपराधों में अदालत में मुकदमा चलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है। इसी प्रक्रिया के तहत CBI द्वारा हरियाणा सरकार से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मांगे जाने की संभावना है। मंजूरी मिलने के बाद एजेंसी अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में CBI की जांच की निगरानी वरिष्ठ स्तर पर की जा रही है। जांच अधिकारी चार्जशीट तैयार करते समय दस्तावेजी साक्ष्यों, अधिकारियों की भूमिका और कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि अदालत में मामला पेश करते समय किसी तरह की तकनीकी या कानूनी कमी न रहे। 661 करोड़ रुपये से जुड़े इस बैंक घोटाले में अब जांच के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद कार्रवाई को लेकर हलचल बढ़ गई है। यदि CBI को आवश्यक अभियोजन स्वीकृति मिलती है, तो 6 IAS अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया और तेज हो सकती है। हालांकि, अंतिम आरोप और संबंधित अधिकारियों की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।




