पंजाब की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। अमृतसर पूर्व से पूर्व विधायक और नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी, डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के हालिया बयानों ने कांग्रेस खेमे में हलचल और भाजपा के गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं। हालांकि उन्होंने अधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उनके शब्दों के तीर सीधे तौर पर कांग्रेस नेतृत्व की ‘कमजोर नब्ज’ पर वार कर रहे हैं।
राहुल गांधी को खुली चुनौती और पीएम मोदी की जमकर तारीफ
कोयम्बटूर में मीडिया से मुखातिब होते हुए डॉ. नवजोत कौर ने जो कहा, वह किसी बड़े राजनीतिक विस्फोट से कम नहीं था। उन्होंने राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए उन्हें “अयोग्य” करार दिया। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि यदि शीर्ष नेतृत्व को जमीनी हकीकत का पता नहीं है, तो वे उस पद के लायक नहीं हैं।
इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक “आध्यात्मिक और संतुलित व्यक्तित्व” बताया। डॉ. नवजोत के अनुसार, मोदी राहुल गांधी की तुलना में कहीं अधिक व्यावहारिक और समझदार नेता हैं। उन्होंने राहुल गांधी को कैमरे के सामने खुली बहस (Open Debate) तक की चुनौती दे डाली है।
पुरानी जड़ों की याद और ‘टैलेंट’ का जिक्र
डॉ. नवजोत ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी पुरानी पार्टी भाजपा को याद करते हुए लिखा कि 2012 में भाजपा ने ही उनके ‘टैलेंट’ को पहचान कर उन्हें टिकट दिया था और काम करने की पूरी आजादी दी थी। यह बयान स्पष्ट संकेत दे रहा है कि वे कांग्रेस में खुद को घुटन महसूस कर रही हैं या फिर अपनी पुरानी ‘घर वापसी’ की भूमिका तैयार कर रही हैं।
नवजोत सिंह सिद्धू की ‘मौन’ रणनीति?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात नवजोत सिंह सिद्धू की खामोशी है। जहां पत्नी कांग्रेस पर प्रहार कर रही हैं और पीएम मोदी की प्रशंसा कर रही हैं, वहीं सिद्धू अभी भी कांग्रेस के पाले में खड़े होकर चुप्पी साधे हुए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि क्या यह ‘सिद्धू परिवार’ की कोई सोची-समझी रणनीति है या फिर पंजाब में किसी नए समीकरण का आगाज?