अंकिता भंडारी हत्याकांड: सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ पर उठे सवाल, वायरल वर्क ऑर्डर ने बढ़ाई मुश्किलें।

 उत्तराखंड की ‘बेटी’ अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि एक नए खुलासे ने पूरे प्रदेश में गुस्से की लहर दौड़ दी है। जहां एक तरफ मुख्य आरोपी पुलकित आर्य जेल की सलाखों के पीछे है, वहीं दूसरी तरफ खबर आ रही है कि उत्तराखंड सरकार उसी के परिवार को करोड़ों का बिजनेस ‘परोस’ रही है।

क्या है वायरल ‘वर्क ऑर्डर’ का सच?

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक सरकारी पत्र (Work Order) तेजी से वायरल हो रहा है। यह कोई साधारण कागज नहीं, बल्कि उत्तराखंड के आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवा निदेशालय द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक आदेश है। इस पत्र पर विभाग के निदेशक विजय कुमार जोगदंडे के हस्ताक्षर हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि ‘संस्कार आयुष मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड’ को सरकारी दवाइयां सप्लाई करने का ठेका दिया गया है।

अपराधी के परिवार को ‘सरकारी संरक्षण’?

सबसे चौंकाने वाली बात इस कंपनी के मालिकाना हक को लेकर है। ‘संस्कार आयुष मेडिकेयर’ के डायरेक्टर विनोद कुमार आर्य और अंकित कुमार आर्य हैं। आपको बता दें कि विनोद कुमार आर्य, मुख्य आरोपी पुलकित आर्य के पिता हैं और अंकित उसका भाई है। विनोद आर्य पहले बीजेपी के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रह चुके हैं।

जब अंकिता हत्याकांड हुआ था, तब सरकार ने जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए वादा किया था कि इस परिवार से सभी सरकारी संबंध खत्म कर दिए जाएंगे और कोई भी नया ठेका नहीं दिया जाएगा। लेकिन इस नए वर्क ऑर्डर ने सरकार की कथनी और करनी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनता का आक्रोश और विपक्ष के तीखे हमले

इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर लोग सरकार को जमकर कोस रहे हैं। अंकिता के माता-पिता आज भी न्याय की उम्मीद में आंसू बहा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोपी के परिवार को आर्थिक लाभ दिया जा रहा है।

विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेत्री सुजाता पॉल ने एक वीडियो जारी कर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि “आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि सरकार को अंकिता के हत्यारों के परिवार के साथ ही ‘मधुर संबंध’ निभाने पड़ रहे हैं?”

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