उत्तराखंड के मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में गृह विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। प्रदेश में हालिया आपराधिक घटनाओं और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सरकार अब बेहद कठोर रुख अपनाएगी।
त्वरित न्याय और तकनीक पर जोर
मुख्य सचिव ने पुलिसिंग को आधुनिक बनाने और कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए:
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ई-समन व्यवस्था: कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया को डिजिटल (e-Summon) करने पर बल दिया ताकि देरी न हो।
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फॉरेंसिक और अभियोजन: साक्ष्यों की जांच के लिए फॉरेंसिक सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए ताकि दोषियों को सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) बढ़ सके।
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थानों का कायाकल्प: थानों में सालों से सड़ रहे जब्त वाहनों की नीलामी कर जगह खाली करने के आदेश दिए।
तहसील और थाना दिवस की होगी वापसी
जनता की समस्याओं के समाधान के लिए अब थाना और तहसील दिवस का आयोजन फिर से शुरू होगा। इसके लिए:
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गृह सचिव, राजस्व सचिव और मंडलायुक्त मिलकर एक SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करेंगे।
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हर महीने कम से कम 2 से 3 विशेष कैंप लगाकर पुराने मामलों का निपटारा किया जाएगा।
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हेल्पलाइन 1905 पर प्राप्त शिकायतों की मॉनिटरिंग खुद जिलाधिकारी (DM) और एसएसपी (SSP) करेंगे।
पॉक्सो, साइबर क्राइम और ड्रग्स पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
मुख्य सचिव ने समाज की तीन बड़ी बुराइयों पर प्रहार करने के लिए रणनीति साझा की:
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पॉक्सो (POCSO): मासूमों के साथ होने वाले अपराधों पर तत्काल और कठोरतम कार्रवाई के निर्देश।
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साइबर क्राइम: बढ़ते डिजिटल अपराधों को रोकने के लिए सिस्टम को मजबूत करने और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर जोर।
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ड्रग्स फ्री देवभूमि: ‘एनकॉर्ड’ (NCORD) की मासिक बैठकें अनिवार्य कर दी गई हैं। ‘मानस’ (MANAS) हेल्पलाइन का प्रचार-प्रसार कॉलेज और विश्वविद्यालयों में बड़े स्तर पर किया जाएगा।