UCC दिवस: उत्तराखंड में समानता का एक साल बेमिसाल, CM धामी ने वीएलसी और अधिकारियों को किया सम्मानित।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रथम ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ के अवसर पर प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड से निकली यह ‘समानता की गंगा’ जल्द ही पूरे देश को आलोकित करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि कुप्रथाओं के खिलाफ एक निर्णायक प्रहार है।

1. आंकड़ों की जुबानी: यूसीसी की सफलता

मुख्यमंत्री ने धरातल पर यूसीसी के प्रभाव को आंकड़ों के साथ साझा किया:

  • पंजीकरण में उछाल: यूसीसी लागू होने से पहले प्रतिदिन औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण होते थे, जो अब बढ़कर 1400 प्रतिदिन हो गए हैं।
  • शत-प्रतिशत उपलब्धि: राज्य की 30% ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।
  • त्वरित निस्तारण: बीते एक वर्ष में प्राप्त 5 लाख आवेदनों में से 95% का निपटारा किया जा चुका है।

2. महिला सशक्तिकरण: कुरीतियों से मिली मुक्ति

सीएम धामी ने भावुक होते हुए कहा कि यूसीसी ने मुस्लिम बहनों को हलाला, इद्दत और बहुविवाह जैसी पीड़ाओं से मुक्ति दिलाई है। पिछले एक साल में राज्य में हलाला या बहुविवाह का एक भी मामला सामने न आना इस कानून की सबसे बड़ी जीत है।

3. कड़े संशोधन: धोखाधड़ी करने वालों की खैर नहीं

राज्यपाल से मिली हालिया स्वीकृति के बाद यूसीसी अब और भी सख्त हो गया है:

  • पहचान छिपाना अपराध: यदि कोई अपनी पहचान छिपाकर या गलत तथ्य बताकर निकाह/विवाह करता है, तो उसे निरस्त कर दिया जाएगा और कड़ी सजा मिलेगी।
  • लिव-इन सुरक्षा: लिव-इन पंजीकरण को अनिवार्य रखा गया है ताकि बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। सीएम ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहती है।

4. विरोधियों को कड़ा जवाब

यूएस (USA) के एक एनजीओ द्वारा ‘हेट स्पीच’ के आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा— “अगर धर्मांतरण और सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बोलना हेट स्पीच है, तो मैं इसे बार-बार कहूँगा।” उन्होंने यह भी साफ किया कि यूसीसी से कोई भी बाहरी व्यक्ति ‘मूल निवासी’ नहीं बन सकता।

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