देहरादून के मसूरी स्थित आईटीबीपी अकादमी में रविवार को भव्य दीक्षांत एवं शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 133 नवदीक्षित अधिकारियों ने राष्ट्र सेवा, संविधान की रक्षा और अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्ण निष्ठा की शपथ लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) की मुख्यधारा में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। समारोह में उत्साह, अनुशासन और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
कठोर और चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद 132 सहायक सेनानी (जीडी) और एक महिला उप-सेनानी (विशेषज्ञ चिकित्सक) बल का हिस्सा बने। इन अधिकारियों ने 18 से 50 सप्ताह तक चलने वाले आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जिसमें उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के लिए तैयार किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को युद्ध कौशल, शस्त्र संचालन, शारीरिक दक्षता, सैन्य रणनीति, आसूचना, मानचित्र अध्ययन, प्रशासनिक कार्यों, न्यायिक प्रक्रियाओं और मानवाधिकारों से संबंधित विषयों की गहन जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य उन्हें एक सक्षम, अनुशासित और जिम्मेदार अधिकारी के रूप में तैयार करना था।
समारोह के मुख्य अतिथि भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत रहे। कार्यक्रम की शुरुआत आईटीबीपी के महानिदेशक राहुल रसगोत्रा द्वारा मुख्य अतिथि और अन्य विशिष्ट अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। मुख्य न्यायाधीश ने नवदीक्षित अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आईटीबीपी देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन करती है।
उन्होंने कहा कि अब इन युवा अधिकारियों के कंधों पर बल की प्रतिष्ठा, अनुशासन और गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। समारोह के दौरान अधिकारियों ने शानदार परेड का प्रदर्शन किया और देश सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह दीक्षांत समारोह न केवल नवदीक्षित अधिकारियों के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।