हरीश रावत की उत्तराखंड वापसी से गरमाई सियासत, रोड शो पर BJP के सवालों का कांग्रेस ने दिया जवाब

देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के लंबे अंतराल के बाद उत्तराखंड लौटने के साथ ही प्रदेश की सियासत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। 20 सितंबर को उत्तराखंड पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका जगह-जगह स्वागत किया और देहरादून तक रोड शो भी निकाला। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कांग्रेस प्रदेश महासचिव नीरज त्यागी ने हरीश रावत के स्वागत को कार्यकर्ताओं के स्नेह और उनके लंबे राजनीतिक अनुभव से जोड़ते हुए कहा कि रावत पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन में अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं और सभी नेता अपने-अपने दायित्वों के अनुसार काम कर रहे हैं।
उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह, करण माहरा और भुवन कापड़ी समेत अन्य नेताओं की संगठनात्मक जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन सामूहिक प्रयासों से मजबूत होता है। उनके मुताबिक हरीश रावत का लंबा राजनीतिक अनुभव भी पार्टी के लिए उपयोगी है। नीरज त्यागी ने राजनीतिक चर्चाओं को लेकर कहा कि नेताओं को लेकर समय-समय पर अलग-अलग तरह की बातें सामने आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा का केंद्र प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दे होने चाहिए। उन्होंने रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड के विकास और आम लोगों से जुड़े सवालों पर गंभीर चर्चा जरूरी है।
BJP ने रोड शो को लेकर उठाए सवाल
हरीश रावत के स्वागत और रोड शो पर भाजपा नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं विधायक विनोद चमोली ने रोड शो को लेकर हरीश रावत की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों और नेतृत्व से जुड़ी खींचतान से जोड़कर देखा। भाजपा की ओर से यह भी दावा किया गया कि रोड शो के जरिए हरीश रावत कांग्रेस संगठन में अपनी राजनीतिक स्थिति और प्रभाव को प्रदर्शित करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, ये भाजपा नेताओं के राजनीतिक आरोप और आकलन हैं।
वहीं, हरीश रावत की उत्तराखंड वापसी के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और स्वागत कार्यक्रमों ने प्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रियता को लेकर चर्चा को फिर से केंद्र में ला दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस जहां रावत के अनुभव और संगठन में उनकी भूमिका को रेखांकित कर रही है, वहीं भाजपा उनके रोड शो और राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस संगठन में उनकी भूमिका और प्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रियता पर नजर बनी रहेगी।



