हरिद्वार के सिडकुल थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में जेल में बंद युवक पर अपनी उम्र कम दिखाने के लिए फर्जी ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) तैयार कराने और उसे असली दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। पुलिस जांच में टीसी फर्जी पाए जाने के बाद आरोपी के खिलाफ कूटरचना और फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं में एक और मुकदमा दर्ज किया गया है।
लड़की की उम्र के बाद सामने आया युवक का नाम
पुलिस के अनुसार, 6 अगस्त को सिडकुल थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान स्कूल की टीसी के आधार पर लड़की की जन्मतिथि 21 जुलाई 2009 सामने आई। इसके बाद पुलिस ने मामले को अपहरण और पॉक्सो एक्ट से संबंधित धाराओं में दर्ज किया। पुलिस ने बाद में लड़की को सकुशल बरामद कर लिया। उसके बयान के आधार पर मामले में पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं। जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में मुजफ्फरनगर निवासी एक युवक का नाम सामने आया।
खुद को नाबालिग साबित करने के लिए फर्जी टीसी का आरोप
पुलिस का आरोप है कि युवक के परिजनों की ओर से उसकी उम्र 18 वर्ष से कम साबित करने के लिए मेरठ के एक निजी इंटर कॉलेज की कक्षा आठ की कथित टीसी उपलब्ध कराई गई थी। इसी दस्तावेज के आधार पर युवक ने खुद को नाबालिग बताते हुए किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद 5 सितंबर को उसे न्यायिक सुरक्षा अभिरक्षा में प्लेस ऑफ सेफ्टी भेज दिया गया था।
कॉलेज से सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने युवक की ओर से प्रस्तुत की गई टीसी का संबंधित कॉलेज से सत्यापन कराया। कॉलेज प्रशासन ने दस्तावेज की जांच के बाद लिखित रूप से स्पष्ट किया कि टीसी उसके संस्थान से जारी नहीं हुई थी और फर्जी है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के अन्य शैक्षिक दस्तावेजों से उसकी उम्र का सत्यापन कराया। जांच में उसकी कक्षा 10 की मूल मार्कशीट मिली, जिसमें जन्मतिथि 15 मार्च 2008 दर्ज थी। पुलिस के मुताबिक, स्कूल के प्रधानाचार्य के बयान और उपलब्ध शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर घटना के समय युवक की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस ने उसे प्लेस ऑफ सेफ्टी से पॉक्सो कोर्ट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जिला कारागार रोशनाबाद भेज दिया गया।
फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने पर नया मुकदमा
पुलिस का आरोप है कि युवक ने खुद को नाबालिग साबित करने के उद्देश्य से फर्जी टीसी तैयार कराई और उसे जांच के दौरान वास्तविक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया। टीसी के फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने अब इस मामले में अलग से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सिडकुल थाना प्रभारी अजय शाह के अनुसार, आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले में दस्तावेज तैयार कराने और उसे इस्तेमाल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि फर्जी टीसी किसने तैयार कराई, इसे उपलब्ध कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे और दस्तावेज का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया।